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थनों में इंफेक्शन से बचने के लिए पशु दुहते समय दूध की पहली 2 बूंदें गिरा दें

3 वर्ष पहले
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किसानों के सामने गर्मियों में दूध को बचाने की समस्या आती है। स्वच्छ दूध हासिल करने के लिए अच्छी नस्ल के पशुओं को रखने के साथ साथ उनको बीमारियों से बचाने और टीकाकरण कराने की जरूरत होती है। अक्सर देखा जाता है कि कच्चा दूध जल्दी खराब होता है। खराब दूध अनेक तरह की बीमारियां पैदा कर सकता है, इसलिए दूध के उत्पादन, भंडारण व परिवहन में खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कच्चे दूध में हवा, दूध दुहने वाले गंदे उपकरणों, खराब चारा, पानी, मिट्टी व घास से पैदा होने वाले कीटाणुओं से खराबी आ सकती है। इस वजह से कम अच्छी क्वालिटी के दूध बाहरी देशों को नहीं बेच पाते हैं जबकि पश्चिमी देशों में इस की मांग बढ़ रही है.वैसे, दूध में जीवाणुओं की तादाद 50,000 प्रति इक्रोलिटर या उस से कम होने पर दूध को अच्छी क्वालिटी का माना जाता है।

स्वच्छ दूध के लिए ये सावधानियां जरूरी, इनको अपनाने से मिलेगा मोती की तरह सफेद दूध

पशुशाला साफ हो, वहां मक्खियां, न हों, शैड में फर्श हो, गोबर व मूत्र निकासी हो, पशुओं को दुहने से पहले शैड साफ और सूखा रखना चाहिए, शैड में साइलेज और गीली फसल नहीं रखनी चाहिए, दुहने से पहले पशु के के थन और आसपास की गंदगी साफ करें, शैड में शांत माहौल होना चाहिए, सुबह और शाम पशुआें को दुहने का तय समय होना चाहिए, दुहने वाले को हाथ में दस्ताने पहनने चाहिए या फिर जीवाणुनाशक घोल से हाथ साफ करने चाहिए, नाखून अच्छी तरह कटे हों, दूध रखने वाले बरतन एल्युमिनियम, जस्ते या लोहे के हों, थनों को परमैगनेट या सोडियम हाइपोक्लोराइड की एक चुटकी गुनगुने पानी में डालकर धोया जाना चाहिए और अच्छी तरह सुखाया जाना चाहिए। दूध की केन को मिट्टी या राख से साफ नहीं करना चाहिए। दोहन से पहले थन से दूध की 2-4 बूंदों को बाहर गिरा देना चाहिए क्योंकि इस में बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा होती है,.दूध हाथ से ही दुहना चाहिए। अंगूठा मोड़कर दूध दुहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, इससे थन को नुकसान हो सकता है और उनमें सूजन आ सकती है। एक पशु का दूध 5 से 8 मिनट में दुह लेना चाहिए, थन में दूध न छोड़ें यह इंफेक्शन की वजह बन सकता है, दूध दुहने के 2 घंटे के भीतर दूध को घर के रेफ्रिजरेटर में 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान में रखें।

इन वजहों से खराब हो सकता है दूध

थनों में इंफैक्शन का होना. पशुओं का बीमार होना,दूध के उत्पादन से संबंधित कोई कमी होना, हार्मोंस की समस्या,पशुओं की सफाई न होना,दूध दुहने का गलत तरीका,दूध दुहने का बरतन और उसे धोने का गलत तरीका,दूध जमा करने वाले बरतन का गंदा होना,चारे व पानी का खराब होना,थनों का साफ न होना।

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