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एक्सपोर्ट कंपनियों के Rs.200 करोड़ जीएसटी रिफंड होगा जारी, दिक्कतें ऑफलाइन होंगी हल

3 वर्ष पहले
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एक्सपोर्ट कंपनियों की एक साल पुरानी जीएसटी रिफंड की दिक्कत अब जाकर हल होनी शुरू हुई है। जीएसटी की रिटर्न में जो डाटा विभिन्न कारणों से गलत हो गया था, उसे हर कंपनी की निजी ईमेल या रिटन कंप्लेंट को पढ़कर ऑफलाइन दूर किया गया है।

इसके बाद देश के 1200 करोड़ रुपए के जीएसटी रिफंड क्लियर करने की मंजूरी आ गई है। इसमें जालंधर की हिस्सेदारी करीब 200 करोड़ रुपए है। पहले चरण में फोकल पॉइंट में मशीन टूल्स व हैंडटूल फर्मों के करीब 50 लाख रुपए जारी हुए हैं। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन कौंसिल के जरिये सिटी के कारोबारी संगठनों ने रिफंड का मसला जीएसटी कौंसिल में रखा था, जिसके बाद विभिन्न कंपनियों की दस्तावेजी दिक्कतें हल की गई हैं।

हैंडटूल कंपनी के भी 15 लाख रुपए हुए जारी

देश के 1200 करोड़ में जालंधर का 10% हिस्सा

सोमवार को फोकल पॉइंट की फर्मों का जीएसटी रिफंड ऑनलाइन डायरेक्ट उनके खातों में जमा हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि जब जीएसटी लागू हुआ था तो तमाम टैक्सेशन अफसरों के दफ्तर के चक्कर काटने पड़ रहे थे। इस बार रिफंड बगैर किसी लोकल टैक्सेशन अफसर की मध्यस्थता के पहुंचा है। इससे वे काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि जालंधर के करीब 200 करोड़ रुपए का जीएसटी रिफंड पेंडिंग है।

हर कंपनी की कंप्लेंट बारी-बारी की गई प्रोसेस...कंपनियों ने अलग-अलग गलतियां रिफंड की डिमांड करते हुई की थीं। मेन गलती थी कि टैक्सेशन को दी जानकारी में कंटेनरों के नंबर गलत डाले थे। दरअसल, कंपनियों ने जालंधर से जो माल कंटेनर में डालकर पोर्ट पर भेजा था, उन्होंने इसके नंबर डाल दिए जबकि जब ये माल देश से बाहर जाने लगा तो एक-एक कंटेनर में मल्टीपल कंपनियों का माल लोड हुआ, जिससे कंटेनरों के नंबर मिसमैच हो गए। टैक्सेशन अफसरों ने बताया कि कइयों के प्रोडक्ट कोड को लेकर कंफ्यूजन रही। कई एक्सपोर्ट कंपनियों की दूसरी जानकारियां मिस मैच थीं। हर कंपनी का केस समझा गया, फिर दिक्कत दूर की गई। अब ऑनलाइन सिस्टम में भी सुधार किए हैं ताकि गलती की गुंजाइश ही न रहे।

...उधर, जालंधर की एक्सपोर्ट कंपनियों के लिए राहत...ईईपीसी के रीजनल डायरेक्टर अपिंदर सिंह ने कहा कि तमाम दस्तावेजी गलतियां अब जीएसटी कौंसिल ने दूर की हैं। रिफंड आना स्टार्ट हुआ है। केवल जालंधर ही नहीं, बल्कि तमाम शहरों की एक्सपोर्ट कंपनियों के लिए बड़ी राहत है। एक्सपोर्टर तरुण सिक्का कहते हैं- जिस पैसे के काम करना है, वह सरकार के खाते में अटका था। बैंक से कर्ज लेकर काम को आगे बढ़ा रहे कारोबारी लगातार परेशान थे। अब रेगुलर तरीके से सारा बैकलॉग निकल जाता है तो फिर से एक्सपोर्ट कंपनियों में माहौल सुधरेगा।

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