किसी भी देश, प्रदेश की ग्रोथ के लिए इंडस्ट्री की जरूरत होती है। हम भी चाहते हैं कि यहां इंडस्ट्री फले-फूले ताकि युवाओं को रोजगार मिले। लेकिन सारे उद्योगपति नियमों का पालन करें। वे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए उद्योग चलाएं तो ब्यास दरिया में मछलियां मरने जैसे हादसे कभी नहीं होंगे।
यह बात पर्यावरणविद संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने इतवार को जालंधर में कांफ्रेंस दौरान कही। वे ब्यास दरिया में इंडस्ट्री का जहरीला पानी मिलने पर चिंता व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यही हालात रहे तो यहां भी सतलुज की तरह जलीय जीव नहीं मिलेगा।
जरूरत है सरकार जल्द लागू करे वाटर एक्ट 1974
संत बोले- सरकार कड़ी कार्रवाई करे।
बीकानेर और मालवा में कैंसर फैला... 80-90 के दशक में सतलुज दरिया मैला होता गया। इसमें हैवी मैटल गिराए जाते रहे। उस पानी का इस्तेमाल मालवा और राजस्थान के लोग पीने के लिए करते थे। सालों वही पानी पीने से कैंसर के इतने ज्यादा मरीज सामने आ गए कि बीकानेर में कैंसर अस्पताल बनाना पड़ गया।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि सरकार अगर वाटर एक्ट 1974 को सख्ती से लागू कर दे तो हर गांव में लोग नदी से ही पीने का पानी लेना शुरू कर देंगे। एक्ट के तहत नदी में थूकना भी अपराध है और उसमें गंदगी फैलने पर प्रतिबंध है।
मछलियों की कुर्बानी को जाया न जाने दें... संत सीचेवाल ने कहा कि मछलियों ने अगर अपना जीवन इंसान की पैसे की भूख के लिए दिया है तो उसे बर्बाद न जाने दें। यह एक संकेत है कि जहरीले पानी से आने वाले दिनों में भी इंसानी जानें जाने वाली हैं। मछलियों की मौत से सबक सीखते हुए इंसानी नुकसान रोकने के लिए काम करें।