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आईसीएसई में देश में सेकेंड रही जैसमीन क्लासमेट्स को पढ़ाकर बनी टॉपर

3 वर्ष पहले
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‘मैंने कभी भी पढ़ाई प्रेशर समझ कर नहीं की। जब मन करता था, तब पढ़ती थी। यूं तो स्कूल से रोज घर आकर रिवाइज करती ही थी लेकिन जब फाइनल एग्जाम को दो महीने ही रह गए थे तो मैंने अपना पूरा जोर लगा दिया। मैं किसी भी टॉपिक को कल पर नहीं छोड़ती थी। मेरे क्लासमेट्स भी मुझसे पढ़ने आते थे। उनकाे कांसेप्ट समझाते हुए मेरी भी प्रेक्टिस हो जाती थी। मैंने केवल मैथ्स की ट्यूशन ली।

माइकल सर ने बेसिक कंसेप्ट्स मुझे अच्छी तरह पढ़ाए। पेपर में जब दो महीने रह गए तो पिछले साल के पेपर सॉल्व किए। सोचा था- स्कूल या फिर जिले में कोई पोजीशन आ जाएगी लेकिन देशभर में सेकेंड पोजीशन पाना वाकई मेरे लिए सरप्राइज था।’ यह कहना है आईसीएसई बोर्ड में देशभर में सेकेंड पोजीशन हासिल करने वाली सेंट जोसेफ गर्ल्स स्कूल की स्टूडेंट जैसमीन कौर का।

जैसमीन ने 99.2 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वे बताती हैं- जब स्कूल से सिस्टर रोजमी का फोन आया तो पता चला कि मैं सेकेंड हूं। मैंने अपना रिजल्ट तीन बार चेक किया, फिर भी यकीन हीं हो रहा था। प्री बोर्ड में तो मेरे दो सब्जेक्ट्स में फुल मार्क्स थे।

जब मन करता था, तब ही पढ़ती थी। कभी भी पढ़ाई प्रेशर समझ कर नहीं की। - जैसमीन, आईसीएसई टॉपर

दूसरों से नहीं, खुद से ही रखती थी कंपीटिशन... जैसमीन कहती हैं- कोई अन्य स्टूडेंट कैसे पढ़ रहा है, इससे उन्हें कभी कोई फर्क नहीं पड़ता था। हमेशा यही माना कि उनका कंपीटिशन खुद से ही है, किसी और से नहीं। खुद को ही चैलेंज दिया करती थीं कि पहले से और ज्यादा अच्छा कैसे करें। कभी भी अपनी पढ़ाई अगले दिन पर नहीं छोड़ी थी। अगर किसी दिन किसी फंक्शन पर जाना भी होता था तो उस दिन के टॉपिक पहले ही पढ़ लेती थीं।

इंग्लिश में अच्छे मार्क्स लाने के लिए की मेहनत... जसवंत नगर की रहने वाली जैसमीन ने बताया कि बोर्ड की ओर से इंग्लिश का पेपर हमेशा टफ आता है। इसलिए इंग्लिश में कम नंबर आने पर परसेंटेज डाउन न हो जाए, इसलिए इंग्लिश पर पूरा जोर लगा दिया। बीच-बीच में सीनियर्स की भी सलाह ली। पेरेंटस कपूरथला विजिलेंस में डीएसपी कर्मवीर सिंह व मां इंग्लिश की लेक्चरर गुरप्रीत कौर ने कभी मुझ पर प्रेशर नहीं डाला। इसके अलावा स्कूल टीचर्स ने भी काफी मदद की व पढ़ाई का अच्छा माहौल दिया।

मैथ्स के पेपर में दोपहर 4 बजे से सुबह 4 बजे तक पढ़ती रहीं ... जैसमीन ने बताया कि मैथ्स के पेपर में एक भी छुट्टी नहीं थी। उस दिन पेपर देकर दो बजे घर आई। दो घंटे तक आराम किया, लंच आदि करके पढ़ने बैठ गई। यूं तो मैं कभी देर रात तक या सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई नहीं करती थी। लेकिन उस दिन दोपहर 4 बजे से अगले दिन तड़के 4 बजे तक लगातार पढ़ाई की। जब पढ़ाई करती थी तो घरवालों को स्ट्रिक्टली बोल रखा था कोई भी कमरे में नहीं आएगा। मुझे जब खाना या पीना होगा, मैं खुद बाहर आ जाऊंगी।

सब्जेक्ट वाइज मार्क्स | मैथ्स : 100; कंप्यूटर : 100; हिस्ट्री, सिविक्स, ज्योग्राफी : 100; साइंस : 98; पंजाबी : 98; इंग्लिश : 98

परीक्षा वाले दिन कभी भी किताब लेकर स्कूल नहीं गई... परीक्षा वाले दिन जब स्कूल जाती थी तो मेरे दोस्त किताब लेकर पढ़ रहे होते थे। उस दौरान कोई इधर-उधर देखता भी नहीं था। लेकिन मैं कभी भी पेपर वाले दिन स्कूल किताब लेकर नहीं जाती थी। पेपर शुरू होने से आधा घंटा पहले ही स्कूल जाती थी ताकि दोस्तों से बातचीत में पढ़ा हुआ भूल न जाऊं। मेरा जब मन करता था, तब पढ़ती थी। अगर कभी मन नहीं होता तो घूमने निकल जाती। ऐसा भी नहीं है कि मैंने टीवी या गैजेट्स से बिल्कुल कटऑफ कर लिया था, बल्कि जैसे मेरे पास फ्री समय होता, उसका इस्तेमाल करती थी।

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