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कनाडा जाने के लिए 45 साल पहले मर चुके सौतेले भाई के बर्थ सर्टिफिकेट पर अकाली नेता ने बनवाया पासपोर्ट; 30 साल बाद खुलासा, कोर्ट में सरेंडर

3 वर्ष पहले
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ब्लड रिलेशन में कनाडा जाने के लिए दाना मंडी भोगपुर के पूर्व चेयरमैन अकाली नेता दविंदर सिंह ने 45 साल पहले मर चुके सौतेले भाई जगमेल सिंह के नाम पर पासपोर्ट बनवा लिया। 29 साल पहले उसका कांगड़ा में एक्सीडेंट हो गया तो कोर्ट ने केस में भगौड़ा करार दे दिया। तब से वह जगमेल सिंह के नाम पर ही जी रहा है।

मामले का खुलासा भोगपुर के गांव बहराम सरिष्टा के किसान संत प्रकाश ने किया। पुलिस ने पर्चा दर्ज किया तो दविंदर सिंह ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। थाना भोगपुर के एसएचओ सुरजीत सिंह ने कहा कि - आरोपी ने माना है कि कनाडा जाना सपना था, जिसके लिए ये सब किया।

एक्सीडेंट में युवक की मौत मामले में वांटेड था

नाम बदलकर कोर्ट और पुलिस को दिया था धोखा

47 साल के आरोपी दविंदर सिंह ने माना कि जगमेल सिंह बनकर उसका कनाडा जाने का सपना तो पूरा हो गया, लेकिन 29 साल पहले एक्सीडेंट केस में उसे जेल हो सकती थी, जिस कारण अपनी पहचान छिपाकर वह जगमेल बनकर ही जिंदगी जी रहा है। एक्सीडेंट केस में ही कोर्ट ने उसे भगौड़ा करार दे दिया। उधर, पुलिस 1973 में मर चुके जगमेल सिंह के नाम पर बनाए पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर कार्ड बरामद करने के लिए अकाली नेता दविंदर सिंह से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने दविंदर सिंह को अदालत में पेश करके जांच के लिए बुधवार एक दिन के रिमांड पर लिया है।

आरोपी ने माना कि 29 अगस्त, 1989 में वह करीब 18 साल का था और ट्रक लेकर कांगड़ा गया था। वहां उससे एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें एक युवक की मौत हो गई थी। थाना नूरपुर पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने अपना असली नाम दविंदर सिंह बताया। बेल जंप कर चुका था तो पुलिस ने उसे भगौड़ा घोषित कर दिया था। एक बार पुलिस उसकी तलाश में आई थी तो उसने कहा था कि वह तो जगमेल है और उसे नहीं पता कि भाई दविंदर कहां चला गया है। आरोपी ने माना कि वह 1993 में कनाडा चला गया था। वहां से लौटने के दो साल बाद उसने मैरिज कर ली थी।

ट्रक के नीचे आ जाने से हुई थी जगमेल सिंह की मौत

आरोपी दविंदर सिंह ने पुलिस के साने माना कि पिता ने दो शादियां की हैं। जगमेल की मां सुरजीत कौर है तो उसकी मां गुरदीप कौर। जगमेल उससे एक साल बड़ा था। जगमेल करीब 3 साल का था, जब 14 मार्च, 1973 को उसकी ट्रक के नीचे आने से मौत हो गई थी।

बर्थ सर्टिफिकेट से 1988 में बनवाया पासपोर्ट

आरोपी के मुताबिक उसे कनाडा जाना था। जगमेल की बहन कनाडा रहती थी। एजेंट से मिला तो पता चला कि ब्लड रिलेशन पर वीजा तुरंत मिल जाता है। उसने जगमेल का बर्थ सर्टिफिकेट इस्तेमाल कर 21 नवंबर, 1988 में पासपोर्ट बनवा लिया। वीजा मिलने तक पिता का ट्रांसपोर्ट बिजनेस संभाला।

टीनू विधायक थे तो बना था दाना मंडी का चेयरमैन

जगमेल उर्फ दविंदर सिंह कभी पूर्व विधायक सरबजीत सिंह मक्कड़ का करीबी रहा है। मक्कड़ ने ही उसे एरिया का यूथ नेता बनाया था। अकाली विधायक पवन टीनू के टेन्योर के दौरान दविंदर दाना मंडी भोगपुर का चेयरमैन बना। कांग्रेस सरकार आने के बाद पद से हटा दिया गया।

किसान संत प्रकाश पर करवाया था हमला

भोगपुर के गांव बहराम सरिष्टा के रहने वाले किसान संत प्रकाश ने कहा कि 19 मई, 2013 को अकाली सरकार थी। मामूली बात को लेकर जगमेल सिंह काका (दविंदर सिंह) ने उस पर अटैक करवाया था। पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया था, मगर काका पर हाथ नहीं डाला था। एक साल वह इंसाफ के लिए भटकता रहा। उसे पता लगा कि जगमेल सिंह की मौत तो 3 साल की उम्र में 1973 में हो गई थी। जबकि जगमेल के नाम पर जी रहे अकाली लीडर का असली नाम दविंदर सिंह है। उसने ब्लड रिलेशन पर कनाडा जाना था तो मर चुके सौतेले भाई के नाम का इस्तेमाल किया। किसान ने अपने स्तर पर 4 साल तक जगमेल को दविंदर साबित करने के लिए सबूत जुटाए।

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