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पीएसईबी 10वीं में 26 स्कूलों के 1278 में से 1112 बच्चे फेल

3 वर्ष पहले
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पीएसईबी 10वीं के नतीजे में जिले के 26 सरकारी स्कूलों के 1278 स्टूडेंट्स में से महज 166 ही पास हुए हैं। 24 स्कूल ऐसे हैं, जिनका रिजल्ट 25 फीसदी से कम है और सरकारी सीसे. स्कूल गिद्दड़पिंडी और खीवा ऐसे दो स्कूल हैं, जिनका रिजल्ट शून्य रहा है।

बोर्ड की परीक्षा का नतीजा गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले स्कूलों का हाल बयां करती इस दास्तां को लेकर बोर्ड ने खाका तैयार किया है। ये हालत जालंधर की ही नहीं, सूबे भर के जिलों के 374 स्कूलों की है। अब शिक्षा विभाग ने इन पर कार्रवाई करने की प्लानिंग की है। क्योंकि 18 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें कुल संख्या से 10 स्टूडेंट भी पास नहीं हुए।

गिद्दड़पिंडी और खीवा के सरकारी स्कूलों का कोई स्टूडेंट नहीं हुआ पास, बोर्ड ने ऐसा नतीजा देने के जिम्मेदार टीचर्स के खिलाफ शुरू की प्लानिंग

24 स्कूलों का नतीजा 25 फीसदी से कम, 2 का 0

स्कूल स्टूडेंट पास रिजल्ट

सरकारी स्कूल गिदड़पिंडी 80 0 00

सरकारी स्कूल खीवा 10 0 00

शहीद स्वर्ण सिंह सरकारी स्कूल खुसरोपुर 47 6 12.77

एसकेएसबी सरकारी स्कूल चक्क कलां 73 18 24.66

दयानंद जूनियर टेक्नीकल स्कूल 14 1 7.14

सरकारी सह शिक्षा स्कूल गढ़ा 121 29 23.97

सरकारी स्कूल गांधी कैंप 41 4 9.76

सरकारी स्कूल भुल्लर 89 17 19.10

सरकारी स्कूल बुंडाला 45 3 6.67

सरकारी स्कूल कोट बादल खां 60 8 13.33

सरकारी स्कूल लोहियां खास 52 2 3.85

सरकारी स्कूल पूरनपुर 47 11 23.40

सरकारी स्कूल सरींह 28 2 7.14

स्कूल स्टूडेंट पास रिजल्ट

सरकारी स्कूल सूरजमल 49 7 14.29

हाई स्कूल मुंडी कासू 38 2 5.26

हाई स्कूल रहीमपुर (काला संघेया 47 2 4.26

हाई स्कूल सरहाली 30 4 13.33

हाई स्कूल उग्गी 64 8 12.50

सरकारी स्कूल निझरां 26 6 23.8

सरकारी स्कूल लित्तरां 23 4 17.39

सरकारी स्कूल बघेला 80 12 15

सरकारी स्कूल बाओपुर 43 5 11.63

सरकारी स्कूल हरीपुर बाया मेहतपुर 31 2 6.45

सरकारी स्कूल परजियां कलां 84 9 10.71

सरकारी हाई स्कूल लड़के मेहतपुर 19 2 10.53

(रिजल्ट फीसदी में )

टीचर्स की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

रिजल्ट से टीचर्स की कार्य प्रणाली पर सवाल भी उठे हैं। पिछली बार गिरे नतीजों पर शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार और उस समय के शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा ने तुरंत प्रभाव से टीचर्स से मीटिंग की थी। यहीं नहीं, उनकी राइटिंग स्किल भी चेक की गई थी, जिसमें पाया गया था कि अधिकतर टीचर्स तो ठीक तरह से लिख भी नहीं पाते। ऐसे में सभी को टीचर्स ट्रेनिंग देने का प्रोग्राम बनाया था। सूबे भर से मेंटोर तैयार करके सभी जिलों के स्कूलों के टीचर्स को टीचिंग ट्रेनिंग दी थी, ताकि बच्चों की कमियों को समझ उन्हें दूर किया जा सके।

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