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शुगर मिल के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो कोर्ट जाउंगा : संत सीचेवाल

3 वर्ष पहले
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गुरदासपुर की कीड़ी अफगान की चड्ढा शुगर मिल का शीरा डालने से ब्यास दरिया का पानी भी मछलियों के साथ-साथ अन्य जीव-जंतुओं के लिए खतरा बनता जा रहा है। इससे पहले सतलुज दरिया लुधियाना और जालंधर की फैक्टरियों का पानी पड़ने से प्रदूषित हो चुका है।

कुछ समय पहले जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर के 100 गांवों और फैक्टरियों का पानी काली बेईंं में पड़ता था, जो बाद में ब्यास दरिया से जा मिलता था। वातावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयास से अब मात्र 4-5 गांवों और कपूरथला शहर का पानी ही बेईंं में फेंका जाता है। ब्यास दरिया अब दूसरे दरियाओं से साफ माना जाता था लेकिन मिल के शीरे ने इसे भी अपनी चपेट में ले लिया है। शीरे से मछलियों को खतरा न हो, इसके लिए विभाग ने दरिया का पानी भी बढ़ा दिया है। फिर भी ब्यास दरिया में छोड़े गए 47 घडियाल और 12 से ज्यादा डॉलफिन के लिए खतरा बढ़ गया है। सीचेवाल ने कहा कि सरकार ने सिर्फ मिल सील करके अपना काम निपटाया है लेकिन असल में कार्रवाई नहीं की। यदि सरकार ने कोई कार्रवाई न की तो वह कोर्ट जाएंगे।

2000 में सीचेवाल ने शुरू की थी बेईं की सफाई

सुल्तानपुर लोधी से लेकर दसूहा तक 160 किलोमीटर काली बेईंं आती है। कुछ समय पहले 150 गांवों, और कई शहरों का दूषित पानी बेईं में पड़ता था। दूषित पानी पड़ने से काली बेईं का पानी भी दूषित हो गया था। यहीं पानी बाद में ब्यास दरिया में मिलता था। साल 2000 में सीचेवाल ने खुद काली बेईं में सफाई शुरू की। जिन गांवों का पानी बेईं में पड़ता था, उसे बंद करवाया। सुल्तानपुर लोधी से दसूहा तक 150 गांवों में से अब सिर्फ कुछ गांवों का पानी बेईं में मिलता है। यह पानी भी बारिश में आता है। सुल्तानपुर लोधी से कपूरथला तक 53 गांवों का पानी बेईं में मिलता था। अब 5-7 गांवों और कपूरथला का पानी बेईं में आ रहा है। इसे भी बंद करने के लिए नोटिस दिया हुआ है। शुगर मिल के शीरे ने सीचेवाल की 18 साल की मेहनत पर 1 दिन में पानी फेर दिया।

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