टिप्पर घोटाले की जांच पूरी, ग्लोब आॅटो के खिलाफ चालान पेश करेगी पुलिस
नगर निगम के टिप्पर घोटाले में पुलिस के इकनॉमिक आफेंस (ईओ) विंग आर्थिक अपराध शाखा की जांच में टिप्पर सप्लाई करने वाली कंपनी ग्लोब ऑटो एजेंसी को दोषी माना है। पुलिस ने रिपोर्ट फाइनल कर दी है और कोर्ट में चालान पेश किया जाएगा। ईओ विंग के इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरप्रीत सिंह और आईओ जतिंदर कुमार ने बताया कि निगम ने भी जांच की थी, जिसमें डीलर को जिम्मेवार बताया गया था। निगम की जांच रिपोर्ट और रिकॉर्ड वेरिफाई किया गया है। निगम की जांच ठीक है।
ईओ ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर चालान तैयार किया जा रहा है, जो अदालत में पेश किया जाएगा। जब निगम में घोटाला सामने आया था तो वर्कशाप में तैनात संजीव कालिया और कांट्रेक्ट पर काम कर रहे सुशील कुमार को सस्पेंड किया था। अब जांच में सिर्फ डीलर ही दोषी है और मुलाजिमों की भूमिका पर सभी चुप हैं।
1.25 करोड़ रुपए की हुई थी खरीद, नहीं बन सकी आठ गाड़ियों की आरसी
पीएम के मिशन में गड़बड़ी दो मुलाजिम किए थे बर्खास्त
करीब डेढ़ साल पहले निगम के हेल्थ डिपार्टमेंट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन की ग्रांट से करीब 1.25 करोड़ में अशोक लेलैंड कंपनी के लोकल डीलर ग्लोब ऑटो एजेंसी से 10 टिप्पर खरीदे थे। 9 टिप्पर का मॉडल 2016 था लेकिन एक टिप्पर का मॉडल 2015 था। चर्चा यह भी है कि एजेंसी ने तीन गाड़ियां पुरानी भेज दीं। इनमें से दो को बदल दिया गया लेकिन एक गाड़ी पुरानी ही रही थी। जांच में गड़बड़ी पकड़े जाने तक वर्कशाप के इंचार्ज संजीव कालिया और सुशील को सस्पेंड कर दिया गया था। संजीव कालिया इस मामले में बच सकते हैं क्योंकि वर्कशाप में तैनाती पर यह मामला सामने लाए थे। ग्लोब ऑटो एजेंसी ने दो मुलाजिमों को बर्खास्त किया था।
टिप्परों में से 1 निकला पुराना तो हुआ खुलासा
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इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका केस प्रॉपर्टी टिप्पर
गड़बड़ी में पुराना पाया टिप्पर पुलिस केस प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त ककर चुकी है। गड़बड़ी के कारण नगर निगम का काम प्रभावित हुआ और एक टिप्पर डेढ़ साल से इस्तेमाल नहीं किया जा सका। निगम के पास मशीनरी की पहले ही कमी है। इस दौरान कूड़ा उठाने के लिए खरीदी गई 8 छोटी गाड़ियां भी आरसी न बनने के कारण इस्तेमाल में नहीं आ पाईं। यह गाड़ियां अब तक वर्कशाप में ही खड़ी हैं। इनकी फेब्रीकेशन करवाने के लिए तीन बार टेंडर लगाए गए लेकिन कोई कंपनी भी काम के लिए नहीं आई। वर्कशाप के इंचार्ज मनदीप सिंह ने अब जाकर आरसी बनवाने के लिए फंड जारी करवाए हैं।
अब सिर्फ डीलर निशाने पर, सस्पेंड मुलाजिमों को लेकर सभी हुए चुप
कांट्रेक्ट मुलाजिम से सिटी बस का रिकॉर्ड भी नहीं मिला
टिप्पर घोटाला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने वर्कशाप में तैनात सेनेटरी इंस्पेक्टर संजीव कालिया और सुशील कुमार को सस्पेंड किया था। संजीव कालिया को तो कार्रवाई के महज 10 दिन बाद ही बहाल कर लिया गया था लेकिन सुशील कुमार को सिटी बस प्रोजेक्ट के लिए कांट्रेक्ट पर रखा गया था। ऐसे में सुशील को हटाया जा सकता है लेकिन सस्पेंशन की कार्रवाई नहीं हो सकती क्योंकि वह सरकारी मुलाजिम नहीं है। सुशील के पास ही सिटी बस से जुड़ा रिकॉर्ड है, जो अब निगम को चाहिए लेकिन मिल नहीं रहा। ऐसे में निगम अधिकारियों पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं। रिकॉर्ड हासिल करने के लिए कोशिश हो रही है।
दिन के बाद ही सस्पेंड मुलाजिम की बहाली
दिन के बाद ही सस्पेंड मुलाजिम की बहाली
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