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मुलाजिम की तैनाती, कमल विहार रेल फाटक खुला

3 वर्ष पहले
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जालंधर | कमल विहार का फाटक (सी-3) पर अब मैन पावर के साथ खुल गया है। फाटक पहले अनमैन था, इसे इलेक्ट्रिकल तो कर दिया गया था पर उसे आपरेट करने के लिए कांटे वाले को लगा दिया गया था। सुरक्षा के लिहाज से इसे ठीक न करार देते हुए रेलवे प्रशासन, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और नार्दर्न रेलवे मेन्स यूनियन की तकरार हो गई थी क्योंकि जब तक फाटक अनमैन था, तब तक वो इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के पास था।

इलेक्ट्रिकल फाटक लगने से यह इलेक्ट्रिकल्स डिपार्टमेंट को हैंडल कर दिया गया था, पर डिमांड थी कि मैन पावर भी दी जाए क्योंकि गेटमैन की पहले से शार्टेज है। इन्हीं कारणों से फिरोजपुर मंडल में करीब 16-17 फाटक इलेक्ट्रॉनिक किए गए पर वो बिना मैन पावर के ओपन नहीं हो सके थे। दूसरी तरफ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट कांटे वाले को गेट पर लगाने का विरोध किया था क्योंकि कांटेवाले का काम सुरक्षा के लिहाज से केवल ट्रेन की शंटिंग करवाना है। यह पठानकोट लाइन पर फाटक है। यहीं माल गोदाम के लिए मालगाड़ी और इंडियन आयल के रैक को शंट करवाना होता है। कांटेवाला गेट खोलेगा या शंटिंग करेगा।

इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने कांटे वाले की पोस्टें पहले से कम होने के कारण अपने स्टाफ को शिफ्ट करने का विरोध किया था। 31 मार्च को नार्दर्न रेलवे मेन्स यूनियन ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया था और चेतावनी दी थी कि बिना मैन पावर बढाएं, गेट को खुलने नहीं देंगे। अब इस फाटक पर बशीरपुरा फाटक के गेट मैन को लगा दिया है।

सी-3 फाटक की हुई मैन्युअल ओपनिंग , सूर्या एन्क्लेव सोसायटी ने की थी फाटक की डिमांड

फिरोजपुर मंडल में 16-17 फाटक इलेक्ट्रॉनिक किए गए पर वो बिना मैन पावर के ओपन नहीं हो सके थे।

जालंधर | कमल विहार का फाटक (सी-3) पर अब मैन पावर के साथ खुल गया है। फाटक पहले अनमैन था, इसे इलेक्ट्रिकल तो कर दिया गया था पर उसे आपरेट करने के लिए कांटे वाले को लगा दिया गया था। सुरक्षा के लिहाज से इसे ठीक न करार देते हुए रेलवे प्रशासन, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और नार्दर्न रेलवे मेन्स यूनियन की तकरार हो गई थी क्योंकि जब तक फाटक अनमैन था, तब तक वो इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के पास था।

इलेक्ट्रिकल फाटक लगने से यह इलेक्ट्रिकल्स डिपार्टमेंट को हैंडल कर दिया गया था, पर डिमांड थी कि मैन पावर भी दी जाए क्योंकि गेटमैन की पहले से शार्टेज है। इन्हीं कारणों से फिरोजपुर मंडल में करीब 16-17 फाटक इलेक्ट्रॉनिक किए गए पर वो बिना मैन पावर के ओपन नहीं हो सके थे। दूसरी तरफ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट कांटे वाले को गेट पर लगाने का विरोध किया था क्योंकि कांटेवाले का काम सुरक्षा के लिहाज से केवल ट्रेन की शंटिंग करवाना है। यह पठानकोट लाइन पर फाटक है। यहीं माल गोदाम के लिए मालगाड़ी और इंडियन आयल के रैक को शंट करवाना होता है। कांटेवाला गेट खोलेगा या शंटिंग करेगा।

इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने कांटे वाले की पोस्टें पहले से कम होने के कारण अपने स्टाफ को शिफ्ट करने का विरोध किया था। 31 मार्च को नार्दर्न रेलवे मेन्स यूनियन ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया था और चेतावनी दी थी कि बिना मैन पावर बढाएं, गेट को खुलने नहीं देंगे। अब इस फाटक पर बशीरपुरा फाटक के गेट मैन को लगा दिया है।

चौगिट्टी से सूर्या इन्क्लेव काे जाने वाले रास्ते पर पड़ने वाले सी-3 फाटक की मैन्युअल ओपनिंग हो गई। जहां भी गेटमैन को लगा दिया है। हालांकि यहां सुविधाएं अभी दी जानी बाकी हैं क्योंकि इसे अभी तैयार किया जा रहा है। गौर हो कि सूर्या एन्क्लेव सोसायटी की तरफ से फाटक की डिमांड भी उठाई गई थी।

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