सिविल अस्पताल में शनिवार उस समय हंगामा हो गया, जब एक महिला ने मृत बच्चे को जन्म दे दिया। परिवार ने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत अस्पताल की गलती से हुई है। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं हुई।
बस्ती पीरदाद निवासी नरिंदर गिल ने बताया कि उन्होंने अपनी प|ी सलमा को पेट दर्द के चलते सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया था। उस समय उनकी प|ी 9 माह, 10 दिन की गर्भवती थी। डॉक्टरों ने जब उसका चेकअप किया तो उन्होंने कहा कि बच्चे की धड़कन का नहीं पता चल रहा। इसकी स्कैनिंग करनी होगी। वे स्कैनिंग करवाने शुक्रवार दोपहर रेडियोलॉजी विभाग पहुंचे तो वहां बैठी मैडम बिस्कुट खा रही थी।
हम स्कैनिंग के लिए कहते रहे- स्टाफ कर्मी बिस्किट खाती रही...
स्टाफ ने 25 मई को आने के लिए कहा
बच्चे के पिता ने कहा- प|ी की हालत गंभीर होने पर स्टाफ से जल्दी स्कैनिंग करने के िलए कहा। स्टाफ ने कहा बहुत भीड़ है। आज स्कैनिंग नहीं हो सकती। आप 25 मई को आ जाना। प|ी की हालत खराब होने के बावजूद मैडम बिस्किट खाती रही और पेशेंट को समय नहीं दिया।
गिल ने कहा कि उसके बाद वे लौट आए। शनिवार सुबह जब दर्द ज्यादा बढ़ गया तो डॉक्टरों ने सिजेरियन कर दिया। तब तक उनका बच्चा दम तोड़ चुका था। गिल ने कहा कि अगर स्कैनिंग सेंटर वाले समय पर स्कैनिंग कर देते तो शायद वे अपने बच्चे को बचाने की कोशिश कर सकते थे।
स्कैनिंग के लिए दो महीने की वेटिंग...सिविल अस्पताल में स्कैनिंग करने के लिए सिर्फ दो डॉक्टर हैं। इनमें डॉ. मोनिका गुप्ता छुट्टी पर हैं जबकि अकेले डॉ. एमपी सिंह ही रोजाना 40 से 60 मरीजों की स्कैनिंग कर रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इतना काम करने के लिए कम से कम 4 डॉक्टर वर्किंग में होते हैं। सिविल में रोजाना 100 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं चेकअप के लिए आती हैं। ऐसे में आधी महिलाओं की ही अल्ट्रा साउंड स्कैनिंग हो पाती है। बाकी को आगे की तारीखें दे दी जाती हैं। सिविल अस्पताल में स्कैनिंग करवाने के लिए जाने वाली महिलाओं को जुलाई महीने की तारीखें दी जा रही हैं। ऐसे में इतने समय में अगर जच्चा-बच्चा को कुछ हो जाए तो जिम्मेदारी उठाने वाला कोई नहीं है।
मुझे जानकारी नहीं
अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। जिस वक्त हंगामा हुआ, उस वक्त वह रेडियोलॉजी विभाग में नहीं थे। शनिवार के दिन मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और सिविल सर्जन दफ्तर में छुट्टी के चलते परिवार सोमवार को सेहत मंत्री को शिकायत भेजेगा।
जो निर्देश मिले, वही किया...इस बारे महिला स्टाफकर्मी ने बताया कि उसका काम सिर्फ नंबर लगाना है। जैसे उसको निर्देश मिलते हैं, वह उसके मुताबिक काम कर देती है।
प्राइवेट में दो लाख तनख्वाह और सरकारी में 65 हजार रुपए
एक रेडियोलॉजिस्ट की प्राइवेट अस्पताल में सैलरी कम से कम दो लाख रुपए प्रति महीना है। पूरे देश में रेडियोलॉजिस्ट की इस समय भारी किल्लत है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले रेडियोलॉजिस्ट जब तजुर्बेकार हो जाते हैं तो उसके बाद प्राइवेट अस्पतालों में काम करना शुरू कर देते हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की फिर से किल्लत हो जाती है। एक रेडियोलॉजिस्ट को सरकारी अस्पताल में शुरुआती सैलरी 65 हजार रुपए मिलती है, जोकि प्राइवेट अस्पताल से लगभग एक तिहाई है।