श्री गीता मंदिर अर्बन अस्टेट फेस-2 में दो दिवसीय पंजाब प्रांतीय संतमत सत्संग का चौथा वार्षिक विशेषाधिवेशन ईश स्तुति प्रार्थना से शुरू हुआ। अंतराष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी सत्यनंद महाराज ने कहा कि मनुष्य शरीर एक ऐसा शरीर है जो भक्ति कर अंधकार प्रकाश और शब्द के प्राकृतिक तीनों पर्दो से पार जा सकता है। ईश्वर की प्राप्ति कर आवागमन के चक्र से मुक्त हो सकता है। अंत में संतमत के वर्तमान अाचार्य पूज्य पाद महर्षि हरिनंदन परमहंस महाराज का पदार्पण हुआ। उन्होंने कहा की जीवन में जितनी ज्यादा मुश्किल दुख तकलीफ हो, लेकिन सत्संग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। क्यों कि सत्संग ही एक ऐसी ताकत है, जिससे हमें सांसारिक दुखों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। जीवन मे कल्याण चाहिए तो सत्संग करना चाहिए, लेकिन सत्संग भी सदगुरु से युक्ति जान करना चाहिए। संत की संतान बन कर अगर युक्ति से भक्ति की तो मनुष्य अवश्य ही आवागमन से मुक्त हो जाएगा।
हम जिससे प्रेम करते हैं , हमारा स्वरूप व व्यक्तित्व वेसा ही बन जाता है
- महर्षि हरिनंदन परमहंस महाराज
हम जिससे प्रेम करते हैं , हमारा स्वरूप व व्यक्तित्व वेसा ही बन जाता है
- महर्षि हरिनंदन परमहंस महाराज
संत की संतान बनकर अगर युक्ति से भक्ति करें, तो मनुष्य अवश्य ही आवागमन से मुक्त हो जाएगा : अाचार्य
अर्बन इस्टेट फेस-2 में हुए संतमत सत्संग के वार्षिक अधिवेशन में संत महापुरुषों के आशीर्वचनों से ज्ञान प्राप्त करते भक्त।
ये रहे मौजूद : यहां चेयरमैन विपन यादव, अशोक यादव, वीरेंद्र यादव, संजीव यादव, सुरेश कुमार, दीपक सैनी, दिलीप यादव, एसके शास्त्री आदि थे।