मनमाने रेट पर शराब बेच रहा सिंडीकेट
शहर में शराब के रेट बढ़ने से कस्टमर परेशान हैं पर विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। 450 रुपए एमआरपी वाली बोतल 700 रुपए में बिक रही है। शराब की बोतल पर मिनिमम प्राइस रेट लिखा होता है। आम तौर पर किसी भी प्रोडक्ट पर मैक्सिमम प्राइस रेट होता है। सिर्फ शराब ही ऐसा प्रोडक्ट है, जिस पर केवल मिनिमम प्राइस लिखा है।
मिनिमम रेट का मतलब कोई भी ठेकेदार इससे कम कीमत पर शराब नहीं बेच सकता लेकिन मैक्सिमम रेट फिक्स नहीं होने की वजह से ठेकेदार आपस में पूल करके शराब के रेट तय कर रहे हैं। कारोबारियों के आपसी तालमेल का खमियाजा आम कंज्यूमर को भुगतना पड़ रहा है।
शराब की बोतल पर है मिनिमम प्राइस रेट, फिक्स नहीं किए मैक्सिमम रेट
47 में से 41 जोन का ठेका एक ही ग्रुप लेने में रहा था कामयाब
सरकार ने नई एक्साइज पाॅलिसी में शराब ठेकेदारों का सिंडीकेट खत्म करने और लोगों को सस्ती शराब मुहैया करवाने के लिए लीकर जोन की संख्या 8 से बढ़ाकर 47 की थी। क्योंकि जितना ज्यादा कंपीटिशन होगा, कस्टमर्स को उतना फायदा होगा। मगर हो इसके उल्ट गया है। शराब में 47 में से 41 जोनों का ठेका एक ही ग्रुप को मिल गया। बाकी सिर्फ 6 जोन बचे थे, जिन्होंने 41 ग्रुप वाली फर्म के साथ अच्छा तालमेल बैठा लिया है। इसके बाद से शहर में शराब कारोबार का सिंडीकेट एक बार फिर से बन गया है। सिंडीकेट जो कीमत तय करता है, उसी पर शराब बिक रही है। शराब कारोबार से सिंडिकेट खत्म करके लोगों को सस्ती शराब उपलब्ध करवाने की सरकार के प्रयास सिंडीकेट ने विफल कर दिए हैं। 41 जोन के ठेके एक ही फर्म को मिले हैं।
सिंडीकेट ने शराब के रेट कम नहीं होने दिए।
पॉलिसी के मुताबिक बिक रही शराब : डीईटीसी
डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर जसपिंदर सिंह का कहना है कि शहर में एक्साइज पॉलिसी के तहत ही शराब बिक रही है। ठेकेदारों की मनमर्जी नहीं चल रही। फिर भी वह अपने स्तर पर चेकिंग करवाएंगे। अगर किसी को कोई शिकायत है तो वह उनके पास लिखित में दाखिल कर सकता है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई जरूर की जाएगी। विभाग की यही कोशिश है कि किसी भी हालत में सिंडीकेट बनाकर कारोबारी ऑपरेट न करें।