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रोडवेज से किराए के 27 लाख रुपए वसूलने नगर परिषद ने 5 बार मांग पत्र लिखे, फिर भी जमा नहीं हो रही राशि

3 वर्ष पहले
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दो रुपए के हिसाब से रोडवेज सालभर के करीब सवा एक लाख रुपए किराया चुकाती थी, लेकिन राशि में बढ़ोतरी कर दस रुपए प्रति बस प्रति ट्रिप करने पर यह राशि सालाना बढ़कर जालोर स्टैंड की करीब सवा पांच लाख रुपए हो गई।

तीस साल पहले किराए पर लिए बस स्टैंड का पांच साल से नहीं चुकाया किराया

वर्ष 2013 के बाद से रोडवेज ने किराया देना किया बंद

दिलीप डूडी | जालोर

आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगरपरिषद (निकाय) ने करीब तीस वर्ष पहले शहर के प्रमुख स्थान पर रोडवेज (निगम) को बस स्टैंड संचालन के लिए करीब दो बीघा जमीन किराए पर दी थी, लेकिन अब उस जमीन के किराए को लेकर निकाय व निगम के बीच विवाद पैदा हो गया है। निगम की ओर से निकाय को पिछले पांच साल से किराया नहीं चुकाया जा रहा है। वर्ष-2013 से 2017 तक के 26 लाख 97 हजार रुपए बकाया चल रहे हैं। नगरपरिषद ने रोडवेज को अब तक पांच पत्र भी लिख दिए हैं, लेकिन रोडवेज किराया चुकाने को तैयार नहीं है। जिस स्थान पर बस स्टैंड संचालन किया जा रहा है, वह भूमि शहर के प्रमुख स्थानों पर है और नगरपरिषद के लिए राजस्व आय का बड़ी स्रोत बन सकती है, लेकिन प्रयासों में कमी के कारण विवाद का कारण बनी हुई है।

परिषद के लिए आय का बड़ा स्रोत : रोडवेज बस स्टैंड की जमीन करीब दो बीघा है। शहर में अस्पताल चौराहा से लेकर गिटको होटल तक सड़क के दोनों तरफ डीएलसी दर व्यवसायिक 60 हजार 960 रुपए प्रति वर्गमीटर तथा आवासीय 9 हजार 60 रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित है। रोडवेज बस स्टैंड भी इस परिधि में आता है। इस लिहाज से व्यवसायिक नजरिए से यह जमीन करीब बीस करोड़ रुपए कीमती है। नगरपरिषद के लिए इस जमीन का व्यवसायिक उपयोग बड़ी आय प्रदान कर सकता है। नगरपरिषद ने अभी तक किराए देने के बाद रोडवेज परिसर में न तो कोई खास विकास करवाया और न ही कोई आय के स्रोत विकसित किए। जिस कारण करोड़ों की जमीन का कोई फायदा नगरपरिषद को नहीं मिल पा रहा है।

तीस साल पहले बस स्टैंड के लिए दो बीघा जमीन दी थी किराए पर, 5 साल से किराया बकाया

किराया दो से बढ़ाकर दस रुपए करने पर पैदा हुआ विवाद

दरअसल, 1988 में नगरपरिषद से रोडवेज ने यह भूमि किराए पर ली थी। उस दौरान प्रति बस प्रति ट्रिप दो रुपए किराया निर्धारित किया था। पच्चीस वर्षों बाद वर्ष 2013 में नगरपरिषद ने किराया बढ़ाने की मांग रखी। जिस कारण निकाय व निगम के उच्चाधिकारियों की जयपुर में बैठक हुई और उसमें प्रति बस प्रति ट्रिप दस रुपए किराया चुकाना तय हुआ, लेकिन रोडवेज ने उसके बाद से निकाय को राशि देना बंद कर दिया। एक-एक करके पांच वर्ष बीत गए। इस कारण अब बढ़कर करीब 27 लाख रुपए बकाया हो गए हैं, लेकिन किराया विवाद को लेकर रोडवेज राशि नहीं चुका रही है। बार-बार मांग पत्र भेजने के बाद भी राशि नहीं चुकाई गई है।

रोडवेज की बसों के रोजाना सौ ट्रिप

इस स्टैंड से रोडवेज की रोजाना सौ बसों के ट्रिप होते हैं। 52 ट्रिप केवल जोधपुर रूट के होते हैं। इसके अलावा नाकोड़ाजी, फालना, जयपुर, अहमदाबाद रूट के ट्रिप शामिल है। दो रुपए के हिसाब से इसका किराया बहुत कम बन रहा था, जिस कारण वर्ष-2013 में नगरपरिषद ने किराया बढ़ाने की मांग उठाई। जिसके बाद इस पर दस रुपए देने का निर्णय भी हुआ, लेकिन बाद में रोडवेज ने ही अधिक किराया राशि होने के कारण किराया चुकाना बंद कर दिया।

सालाना पंाच लाख बनते हैं किराए के

किराया दर में बढ़ोतरी को लेकर विवाद

पहले प्रति बस प्रति ट्रिप दो रुपए किराया था, लेकिन 2013 में यह राशि दस रुपए कर दी गई। उसके बाद से ही विवाद चल रहा है। किराया निगम के उच्च स्तर पर निर्भर है। जो मांग पत्र मिलते हैं, वे हम उच्च स्तर पर भेज देते हैं। - यशवंत सिंघारिया, मुख्य प्रबंधक, जालोर डिपो

प्रदेशभर में ये ही हालात

प्रदेश में रोडवज के 52 डिपो संचालित हो रहे हैं, इनमें से करीब आधे डिपो के बस स्टैंड संचालन निकायों की जमीन पर किया जा रहा है। किराया विवाद बढ़ने के कारण प्रदेशभर में निकायों को राशि नहीं चुकाई जा रही ही है। जहां डिपो व स्टेशन एक स्थान पर है, वहां डिपो की स्थिति ठीक है। कई स्थानों पर डिपो व स्टैंड अलग-अलग जगहों पर संचालित किया जा रहा है। जालोर में भी डिपो व स्टैंड अलग-अलग संचालित किए जा रहे हैं।

कई बार मांग पत्र भेजे हैं

करीब तीस साल पहले निकाय की जमीन रोडवेज को किराए पर दी थी, पूर्व में किराया चुकाया जा रहा था, लेकिन किराया बढ़ोतरी में निर्णय होने के बाद रोडवेज ने किराया नहीं चुकाया। हमने कई बार मांग पत्र भेजा है। - भंवरलाल माली, सभापति, नगरपरिषद, जालोर

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