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जिला अस्पताल में 2 अप्रैल को भर्ती हुआ था मजदूर, तीसरे दिन फुटपाथ पर मिला था मृत

3 वर्ष पहले
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गत 5 अप्रैल को शहर के पुराना बस स्टैंड के पास दुकानों के फुटपाथ पर एक मजदूर की हुई मौत के मामले में पूर्व पार्षद ने अस्पताल के पीएमओ के खिलाफ इस्तगासे के जरिए मुकदमा दर्ज करवाया है। उसने बताया कि जिस मजदूर को 2 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था उस मजदूर की मौत दो दिन बाद ही अस्पताल से दूर पुराना बस स्टैंड की दुकानों के फुटपाथ पर कैसे हुई? इधर, नियंत्रक डॉ. रमेश चौहान का कहना है कि मरीज को 3 अप्रैल को रैफर किया गया था।

व्यापारियों ने जताया था आक्रोश, शिकायतें भी हुई : गौरतलब है कि 5 अप्रैल को शहर के पुराना बस स्टेंड के बाहर दुकानों के फुटपाथ पर एक शव पड़ा हुआ था। सूचना पर पुलिस ने उसे सामान्य चिकित्सालय पहुंचाया था। जहां पूर्व पार्षद शेरू खां, मनीष मोटवानी, कमलेश गुजराती, रमेश अग्रवाल सहित अन्य शहरवासियों ने उसकी पहचान ग्वालियर निवासी रघुवीर मेघवाल के रूप में हुई थी। शहरवासियों ने इस दौरान यह आरोप लगाया था कि पीएमओ डॉ. शर्मा ने पहले तो शव को मोर्चरी में रखने से ही मना कर दिया था। जब अधिकारियों से शिकायत की तो उन्होंने मोर्चरी खुलवाई, लेकिन वहां बर्फ तक नहीं था। पीएमओ ने किसी तरह का सहयोग नहीं करने की बात उपखंड अधिकारी राजेंद्रसिंह सिसोदिया ने भी स्वीकारी थी। एसडीएम सिसोदिया के कहने पर सुमेरसिंह धानपुर ने गाड़ी का खर्च वहन करते हुए रघुवीर को उसके पैतृक गांव ग्वालियर भिजवाया था।

2 अप्रैल को भर्ती किया था शख्स को, 4 की रात को फुटपाथ पर हुई मौत
पूर्व पार्षद ने करवाया मुकदमा दर्ज
पूर्व पार्षद शेरू खां ने अस्पताल पीएमओ डॉ. एसपी शर्मा के खिलाफ इस्तागासे के जरिए मुकदमा दर्ज करवाया है। जिसमें उसने बताया कि 2 अप्रैल को सवेरे रघुवीर को उन सब लोगों ने अस्पताल में भर्ती करवाया था। उस समय रघुवीर की हालत गंभीर थी, लेकिन उसका उचित उपचार नहीं किया। फिर 4 अप्रैल की रात फुटपाथ पर सोते-सोते ही उसकी मौत हो गई। शेरू खां ने बताया कि जब रघुवीर को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था तो फिर वह फुटपाथ पर कैसे आया? इधर, जब शव को अस्पताल लेकर आए तो वहां पीएमओ ने शव को रखने से भी मना कर दिया। बाद में उपखंड अधिकारी के हस्तक्षेप करने पर पीएमओ ने मोर्चरी खोली। इसके बाद पीएमओ ने बर्फ तक लाकर नहीं दी तथा शव को जल्दी ही ले जाने का कहते रहे। शेरू खां ने बताया कि पीएमओ ने मानवता को शर्मसार किया है, जबकि वे अस्पताल के प्रमुख अधिकारी है।

रैफर कर दिया था

उस मरीज को 2 अप्रैल को भर्ती किया गया था, लेकिन 3 अप्रैल को रैफर कर दिया था। अब वह कहां गया? हमें नहीं पता? - डॉ. रमेश चौहान, उप नियंत्रक, सामान्य चिकित्सालय जालोर

सूचना के अधिकार के तहत कागज लिए, डिस्चार्ज कागज नहीं
शेरू खां ने इस मामले में रघुवीर के भर्ती तथा डिस्चार्ज कागज सूचना के अधिकार के तहत मांगे थे। जिसमें अस्पताल की ओर से उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों में 2 अप्रैल को सवेरे 11 बजे भर्ती होने की पर्ची तो है, जिसमें डॉ. हेमंत जैन ने चेकअप कर भर्ती किया था। शेरू खां ने बताया कि रघुवीर की हालत गंभीर थी, फिर भी उपचार नहीं किया और अस्पताल से निकाल दिया।

अस्पताल प्रशासन पर खड़े हो रहे सवाल...
2 अप्रेल को अस्पताल में भर्ती हुए मरीज को अस्पताल प्रशासन बता रहा है कि उसे रैफर किया गया, लेकिन इस प्रकार के कोई कागज अस्पताल के पास उपलब्ध नहीं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की मरीजों के प्रति संवेदनहीनता उजागर हो रही है।

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