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खुदाई में मिले अवशेषों के बाद पुराविदों का दावा- एक हजार नहीं पंद्रह हजार पहले बसा था जूनाखेड़ा

3 वर्ष पहले
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देसूरी (पाली). जूनाखेड़ा नाडोल की खुदाई के बाद इस प्राचीन स्थान को एक हजार वर्ष पुराना बताया जा रहा था। मगर लगातार हो रही खुदाई में मिले अवशेषों के बाद पुराविदों ने नया दावा किया है। उनका कहना है कि जूनाखेड़ा नाडोल एक हजार नहीं पंद्रह हजार पहले से बसा हुआ था। इसको लेकर पुराविदों द्वारा लगातार अवशेषों पर अध्ययन किया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि प्राचीन शिलालेखों में नाडोल को नंदपुर,नांदोल,नारदपुर,नाडोल बताया गया है तथा यह चौहान वंशीय शासकों की राजधानी थी। जिसका साम्राज्य जालोर व बाड़मेर तक फैला हुआ था। नाडोल कस्बे के पास से गुजर रही भारमल नदी के पास ही प्राचीन जूनाखेड़ा स्थान है।

बताया जाता है कि प्राचीन काल में नदियों के किनारे ही गांव बसे हुए थे। भारमल नदी नाडोल के किनारे स्थित जूनाखेड़ा की पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों से लगातार खुदाई की जा रही है। यहां पर पुराविदों को अन्वेषण एवं उत्खनन में एक पूरी सभ्यता के दस्तावेज स्वरूप कई साक्ष्य यथा सिक्के,शिलालेख तथा मंदिर के अवशेष आदि मिले हैं। यहां पर ईंटों से बने पक्के फर्शदार कमरे और यज्ञ वेदिका, कुल्हड़,ढकनी,सिकारे,टोटीदार बर्तन आदि भी मिले हैं।

यह सभ्यता 1 हजार नहीं 15 हजार पहले बसी होने के मिले अवशेष

जूनाखेड़ा को एक हजार पहले बसा हुआ बताया जा रहा है। इसकी जानकारी के लिए इस बार 25 फीट गहराई में खुदाई करने के बाद मिले अवशेषों के बाद यह दावा किया जा सकता है कि यह सभ्यता एक हजार नहीं पंद्रह हजार पहले से बसी हुई थी। -डॉ.विनीत गोधल, खोज उत्खनन अधिकारी, नाडोल

खुदाई में मिला पांच फीट से अधिक बड़ा कंकाल: पुराविदों द्वारा जूनाखेड़ा की जब-जब खुदाई की है। इसमें कुछ न कुछ मिला है। इस बार पुराविदों को खुदाई के दौरान पांच फीट से अधिक बड़ा मानव कंकाल मिला है। जबकि कुछ दिनों पूर्व मानव की खोपड़ी खुदाई में मिल चुकी है।

उत्खनन में सिक्कों पर ,,प,, लिखा मिला : जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल की खुदाई में विभिन्न प्रकार के सिक्के मिले हैं। जिन पर अलग-अलग प्रकार की डिजाइन बनी हुई। कुछ सिक्के मिले हैं, जिस पर सूर्य का प्रतीक उकेरा हुआ है, जबकि कुछ सिक्कों पर ,,प,, लिखा हुआ है। जिससे यह संकेत मिलते हैं कि पंद्रह हजार पूर्व भी सिक्कों का चलन होता था।

25 फीट से अधिक गहरी खुदाई की

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा जूनाखेड़ा की खुदाई में मिले अवशेषों के बाद इस स्थान पर खुदाई जारी रखी। इस स्थान के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए पुराविदों ने 25 फीट से अधिक गहराई तक खुदाई की, जिसमें मिले अवशेषों के बाद पुराविदों ने दावा किया कि जूनाखेड़ा एक हजार नहीं पंद्रह हजार पहले से ही बसा हुआ था। पुराविदों को खुदाई में ईंटें,लोहे,कोयले सहित मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े मिले हैं। जिसके बाद पुराविदों द्वारा दावा किया गया कि यह सभ्यता पंद्रह हजार पुरानी सभ्यता हो सकती है।

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