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बागुंदा गांव के दशरथ सिंह ने घुड़सवारी में 4 बार मुंबई व पुणे चैंपियनशिप जीती

3 वर्ष पहले
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पिता को महज 15 साल की उम्र में ही खो देने वाले आहोर तहसील के एक छोटे से गांव बागुंदा निवासी दशरथ सिंह घुड़दौड़ में एक जॉकी (घुड़सवार) के रूप में देश ही नहीं विदेशों में भी कई खिताब जीतकर जालोर का नाम रोशन कर रहे है। दशरथसिंह के पिता ओटसिंह देवड़ा पटवारी थे, 2002 में हार्ट अटैक से देहांत हो गया था। इस दौरान उन्हें सदमा लग गया। जिससे दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद स्कूल छूट गई और वे अपने नाना के साथ मुंबई चले गए। जहां उन्होंने घुड़सवारी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। वर्ष 2006 से वे 4 बार मुंबई तथा 4 बार पुणे में घुड़सवारी की चैंपियनशिप जीत चुके है।

बचपन में ही पिता का देहांत हुआ, पढ़ाई छूटी और बना लिया घुड़सवारी को कॅरिअर, पुणे, दिल्ली व कलकता डर्बी में रहे अव्वल, अब लक्ष्य मुंबई डर्बी जीतना

3 बार डर्बी प्रतियोगिता जीतने में रहे कामयाब

देश की प्रसिद्ध घुड़दौड़ में से एक डर्बी घुड़दौड़ प्रतियोगिता को तीन बार अपने नाम कर चुके हैं। 2013 में पुणे डर्बी, 2014 में दिल्ली डर्बी, 2017 में कलकत्ता डर्बी जीतकर प्रतियोगिता में अव्वल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि घुड़दौड़ के क्षेत्र में नाना पुरतुसिंह जोधा व मामा बजंरगसिंह जोधा से मिली प्रेरणा के बाद दशरथ सिंह की घुड़दौड़ में रुचि बढ़ गई और उन्हें 2006 में एक जॉकी के रूप में लाइसेंस मिल गया और वो क्लबों की ओर से खेलते हुए घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगे। कॅरियर की शुरुआत में ही दशरथ सिंह ने 2006-07 की मुंबई व पुणे चैंपियनशिप अपने नाम की। इसी प्रकार सिंह ने चार बार मुंबई चैंपियनशिप, चार बार पुणे चैम्पियनशिप भी जीती है। दशरथसिंह ने मॉरिशस में आयोजित प्रतियोगिता में दूसरा व मकाओ में तीसरा स्थान प्राप्त किया।

खांडी से हुई शुरुआत विदेशों तक पहुंचे

दशरथ सिंह का ननिहाल जोधपुर जिले के एक छोटे से गांव खांडी गांव में है। बचपन से ही ननिहाल में आना जाना लगा रहता था। दशरथसिंह के मामा व नाना प्रोफेशनल घुड़सवार थे और उनकी प्रेरणा से घुड़सवारी सीखने का जुनून चढ़ गया। जिसके बाद मुंबई में दो साल तक जॉकी स्कूल में प्रशिक्षण लिया। 2006 में एक प्रोफेशनल घुड़सवार के रूप में प्रतियोगिताओं में भाग लेना प्रारंभ किया।

2010 में घोड़े से नीचे गिरे, छह महीने रहे घुड़सवारी से दूर

प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन का दौर चल रहा था। उसी बीच 2010 में एक प्रतियोगिता के दौरान मुंबई में घुड़दौड़ के समय घोड़े से नीचे गिर कर चोटिल हो गए थे। जिसके कारण करीब छह माह तक जॉकी दशरथसिंह को मैदान से दूर रहना पड़ा।

मुंबई डर्बी जीतना मेरा सपना है

देश की सबसे बड़ी प्रतियोगिता मुंबई डर्बी प्रतियोगिता जीतने का मेरा सपना है और मुझे विश्वास है कि उसे भी मैं जल्द ही अपने नाम करुंगा। - दशरथसिंह, घुड़सवार (जॉकी)

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