पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि 70 वर्ष से हमारा समाज सांपों को दूध पिलाता रहा, जो हमारे बापों को ही डसते गए, उन्होंने कहा कि अंबेडकर हमारा बाप है। वे शनिवार दोपहर को जालोर मुख्यालय पर 2 अप्रेल को भारत बंद को लेकर हुई गतिविधियों के मामले में भाजपा संगठन की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि 2 अप्रेल को भारत बंद कराने की साजिश बामसेफ की थी और उसमें पर्दे के पीछे कांग्रेस का हाथ था। गर्ग ने कहा कि भाजपा के अच्छे कार्यों के कारण एससीएसटी वर्ग का रुझान भाजपा के प्रति बढ़ रहा है, जिस कारण बाकी राजनीतिक दल घबरा रहे हैं। जिस कारण एससीएसटी के लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार ने आरक्षण खत्म कर दिया और एससीएसटी कानून खत्म कर दिया गया है। जबकि, यह सरासर गलत है। सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर को कभी कांग्रेस ने पसंद नहीं किया और न ही आजादी के समय से ही कांग्रेस से बाबा साहेब जुड़े। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग जय भीम बोलकर मुखर हो रहे हैं, उन्हें वो पत्र जरूर पढ़ लेना चाहिए जो डॉ. अंबेडकर ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को लिखा था। डॉ. अंबेडकर के अनुयायी कांग्रेस को 70 साल से मजबूत करते रहे। जबकि कांग्रेस ने हमेशा बाबा साहेब की खिलाफत की। गर्ग ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत र| दिलाने, जयंती पर अवकाश घोषित करने, डाक टिकट जारी करने और स्मारक बनाने की मांग कई बार लोगों ने की, लेकिन कांग्रेस मांग ठुकराती रही। कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई तब जाकर मृत्यु के 35 साल बाद भारत र| दिया जा सका। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने दलित समाज को राजनीतिक रूप से मजबूती प्रदान की है।
कुछ लोग गलती से फंस गए : गर्ग ने कहा कि 2 अप्रेल को भारत बंद की घटना में कई निर्दोष लोग फंस गए थे। उन्होंने कहा कि कई बार प्रदर्शन के दौरान ऐसा हो जाता है। अब जो निर्दोष फंसे हैं, उन्हें बाहर निकालने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। ताकि उनके विरुद्ध चालान पेश नहीं हो। उन्होंने कहा कि लोग शांति पूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने गलतियां की। जिस कारण त्वरित गिरफ्तारियों में निर्दोष भी हत्थे चढ़ गए, लेकिन सरकार निर्दोष को फंसने नहीं देगी।
प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने पत्रकारों के समक्ष रखी बात
बातचीत करते पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग।