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जिले की कुल आबादी क

3 वर्ष पहले
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जिले की आधी से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर फिर भी कृषि विभाग में 274 में से 183 पद खाली

, किसानों को नहीं मिल रही उन्नत तकनीक की जानकारी


जिले की कुल आबादी के 70 प्रतिशत अधिक लोग कृषि पर निर्भर है। जो कृषि संबंधी कार्य कर अपना जीवन यापन करते है। जिले का कृषि विभाग बिना अधिकारियों के संचालित हो रहा है। विभाग के पदों पर नजर डाले तो जिले के कृषि विभाग में कुल 274 पद स्वीकृत है जिसमें 183 पद खाली पड़े है व महज 91 पद भरे हुए है। दुर्भाग्यपूर्ण लोगों को कृषि विभाग में रिक्त पदों के कारण आए दिन समस्याओं का समाधान करना पड़ता है। किसान वर्ग को विभाग में रिक्त पदों के चलते न तो समय पर सलाह मिल पाती है नाही समस्याएं बता पाते है। जिसके चलते आम किसानों को पता ही नहीं रहता कौनसी योजनाएं आती है और कब जाती है वह लाभ लेने से वंचित रह जाते है। विभाग के कार्मिकों पर भी एक से अधिक चार्ज होने के कारण कार्य भार बढ़ जाता है जिसके कारण यह सभी किसानों तक भी नहीं पहुंच पाते है।

केवल 74 कृषि पर्यवेक्षक के भरोसे पूरा जिला

किसानों के लिए कृषि पर्यवेक्षक एक मददगार के रुप में कार्य करते है। और यह लगातार किसानों के संपर्क में भी रहते है। इससे किसानों की समस्याओं का त्वरित निराकरण होता है। मगर विभाग की उदासीनता के चलते जिले में पर्यवेक्षकों के 198 में से 124 पद खाली है व सिर्फ 74 पद पर ही जिले भर में कृषि पर्यवेक्षक के पद भरे हुए है।

जिसका परिणाम किसान भुगत रहे है जिन्हें समय पर फसलों से संबंधित कई जानकारियां नहीं मिलती है व समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं होने से किसानों को कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता है।

किसान मानसून के इंतजार और खेती की तैयारियों में जुटे, विभाग से नहीं मिल रही सहायता

फैक्ट फाइल

विभाग में कुल स्वीकृत पद : 274

वर्तमान में खाली पद : 183

वर्तमान में भरे हुए पद : 91

जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल : 10 लाख 56 हजार 602 हेक्टेयर

जिले में कृषि योग्य भूमि : 8 लाख 63 हजार 906 हेक्टेयर

जिले में सिंचित भूमि : 2 लाख 90 हजार 809 हेक्टेयर

पर्यवेक्षकों के 198 में से 124 पद खाली, न सलाह ले पाते है न समस्या बता पाते है किसान

रिक्त पदों के चलते किसानों को नहीं मिल रही उन्नत तकनीक की जानकारी

जिले के प्रमुख अधिकारियों के पास भी दो-तीन जिम्मेदारियां

जिले के एक ही अधिकारी पर कई पदों का चार्ज होने के कारण कार्य का दबाव रहता है। कई कार्मिकों पर एक से अधिक चार्ज के कारण कार्य करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी प्रकार सहामुख्यालय, उपजिला जालोर, उपजिला भीनमाल तीनों का चार्ज फुलाराम मेघवाल कृषि अधिकारी पर है। जो तीन-तीन मुख्य चार्ज देख रहे है। जिसका विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। जिले के मुख्य अधिकारियों के पद ही भर दिए जाए तो कार्य में निपुणता आ सकती है।

जालोर. जिला मुख्यालय पर स्थित कृषि विभाग कार्यालय।

पीएम मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना हो रही निष्फल साबित

प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना रिक्त पदों के कारण नकारा साबित हो रहा है। पदों के रिक्त होने से यह कार्ड नहीं बन पा रहे है इसके लिए कर्मचारियों को किसानों के खेत तक जाना होता है व कार्ड बनाने की प्रक्रिया की जाती है। मगर विभाग के पास इसके लिए स्टाफ ही नहीं है तो कार्ड बनना भी संभव नहीं है जिसके चलते पीएम मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना धरातल पर शून्य साबित हो रही है। महज यह तो एक उदाहरण है इस तरह हर साल कई योजनाएं रिक्त पदों के कारण निष्फल साबित होती है।

वर्तमान में उन्नत कृषि की आवश्यकता, मगर नहीं पहुंच पाती किसानों तक

सरकार की ओर से कृषि विभाग में उन्नत कृषि के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जाती है। मगर रिक्त पड़े पदों के चलते यह किसानों तक नहीं पहुंच पाती है। विभाग सिचाई पाईपलाइन द्वारा, खेत तलाई, कृषि यंत्र, फसल प्रदर्शन, मिनि किट, तकनीक योजना यथा उन्नत व वैज्ञानिक विधि द्वारा दी जाने वाली कई जानकारी दी जाती है।

मगर कार्मिकों के अभाव में किसानों तक नहीं पहुंच पाती है।

किसानों के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं

हमारी ओर से रिक्त पदों को लेकर उच्चाधिकारियों को जानकारी भी भेजी जाती है। मगर जिले भर में कृषि विभाग में लंबे समय से कई पद रिक्त पड़े है। कार्यरत कार्मिकों की ओर से किसानों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाने की पुरजोर कोशिश की जाती है। किसानों के लिए विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किए जाते है। - फुलाराम मेघवाल, सहायक निदेशक, कृषि विभाग जालोर

दबाव में कार्य कर रहे हैं कार्मिक

रिक्त पदों के चलते दूसरे पदों का चार्ज कार्मिकों पर होने के कारण कार्यभार बढ़ जाता है। जिससे हर समय कार्मिकों पर कार्यों का दबाव रहता है। पूरे जिले में यही हाल है एक-एक कार्मिक के पास तीन-तीन, चार-चार लोगों का काम संभालना पड़ रहा है। कृषि विभाग के अधिकतर पद खाली होने के कारण कार्मिक सभी किसानों तक नहीं पहुंच पाते है।

इसके चलते किसानों को विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती है। जिससे किसानों को नुकसान होता है।

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