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बेईमानी का धन सुख नहीं देता, ईमानदारी से जो मिले उसी में संतोष करना सीखें: चंद्रप्रभा

3 वर्ष पहले
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कम्युनिटी रिपोर्टर | जामगांव आर

गुजरा में जैन साध्वी शासन प्रभाविका चंद्रप्रभा श्रीजी और अध्यनशिला जिन प्रभा श्रीजी का आगमन शनिवार को हुआ। उन्होंने यहां प्रवचन किया, जिसका लाभ जैनश्री संघ जामगांव आर, भखारा, डौडी लोहारा, पंदर, गुजरा, उतई के भक्तों ने लिया।

सौभाग्य मुनि श्रीजी मसा कुमुद की शिष्या चंद्रप्रभा ने कहा कि कर्मों से अर्जित पुण्य और पाप समय के अनुसार उदित होते रहते हैं। बेईमानी से कमाया गया धन कभी भी सुख शांति प्रदान नहीं करता। लेकिन पूर्व में संचित पुण्य उदय होने से बेईमान का जीवन भी अच्छा होने लगता है। यह केवल अज्ञानता का भ्रमजाल है कि बेईमान व्यक्ति ऐशो आराम से जीते हैं। जबकि उन्हें अपने पाप कर्मों के अनुसार वेदना मिलती है।

शनिवार को गुजरा पहुंची साध्वियों का प्रवचन लाभ जैनश्रीसंघ के सदस्यों ने लिया।

प्रतिदिन सामयिक से सोच होगी सकारात्मक
साध्वी ने कहा कि सामायिक की प्रक्रिया एक टॉनिक की तरह है, इसे प्रतिदिन ले कर देखें। जीवन में सोच सकारात्मक होता चला जाएगा। सुबह का सामायिक दिनभर ताजगी देता है। संसार के निर्वहन के दौरान होने वाले पापों से अलर्ट करता है।

साध्वियां आज विहार कर पहुंचेंगी ग्राम गब्दी
जैन साध्वी चंद्रप्रभा और जिनप्रभा का चातुर्मास भखारा में है। वे गुजरा से रविवार को विहार कर गब्दी में विश्राम करेंगी। सोमवार को गब्दी से विहार कर जामगांव आर में पहुंचेंगी, जहां जैनश्री संघ जामगांव आर के श्रावकों को साध्वियों का प्रवचन लाभ मिलेगा।

श्रावकों के जिज्ञाषा को शांत करते हुए साध्वी चंद्रप्रभा ने कहा कि साधना में दम है। ब्रह्मचर्य साधक की साधना उत्कृष्ट होती है। साधना ध्यान की सीख लेने उदयपुर का प्रवास करें। तरोताजा होकर लौटें। जीवन का मर्म को समझकर स्वयं और दूसरों का भला करें। प्रवचन लाभ गोवर्धन चंद कोचर, मंगल चंद बैद, सुरेश बैद, प्रेमचंद चौरड़िया, भागचंद जैन, भोमराज जैन, मिश्रीलाल चोपड़ा, हेमराज छाजेड़, विकास चोपड़ा, सतीश नाहटा आदि ने लिया।

जीवन का मर्म समझें, दूसरों का भला करें
उद्देश्य भूल पैसों के पीछे भाग रहा मानव
साध्वी चंद्रप्रभा ने कहा कि दुर्लभ मानव जीवन, कर्म करते हुए भव से पार होने, जन्म-मरण से मुक्ति पाने के लिए मिला है। लेकिन आदमी इस बात को भूलकर संसार में धन के पीछे ऐसे उलझ गया है कि अपना उद्देश्य ही भूलने लगा है। भूले हुए लोगों को साधु संत सानिध्य में आते ही किसी न किसी शैली में दया पालने की सीख देते हैं। आदमी स्वयं राह से भटककर खुद के साथ अन्याय कर रहा है। उन्हें स्वयं पर दया करना चाहिए। जो स्वयं पर दया करना सीखता है, वही दूसरों पर दया कर सकता है। इसलिए हमेशा अपना ज्ञान बढ़ाकर दूसरों को भी बांटें।

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