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ओडीएफ पंचायत के शौचालयों में भरे हैं कंडे और भूसा

3 वर्ष पहले
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खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) गांव की जमीनी हकीकत जानकर आप हैरान रह जाएंगे। टोडरा ग्राम पंचायत के गांव देवीपुरा 32 शौचालय हैं, लेकिन इस्तेमाल किसी का भी नहीं होता है। वजह है कि यह अधूरे बने हैं। किसी की छत नहीं है तो किसी में गेट गायब है। इसलिए इसमें कंडे और भूसा रखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के नाम पर अधिकारी फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। उन्हें किसी का डर नहीं है। जनप्रतिनिधि भी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। राघौगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत टोडरा के गांव देवीपुरा में सहरिया समुदाय के 32 परिवार हैं, सभी के यहां शौचालय तो बन गए लेकिन इस्तेमाल कोई नहीं करता है। गांव के बुजुर्ग बाबूलाल सहरिया का कहना है कि पंचायत ने ही काम करवाया था। शौचालय के हल्के गेट लगाए जो टूट गए। इसकी छत भी नहीं कराई गई। निर्माण घटिया हुआ तो अब यह शौचालय टूटने लगे हैं। संवाददाता ने इस गांव की जमीनी हकीकत गांव जाकर देखी। सभी लोग हाथ में लोटा लेकर खुले में शौच के लिए जा रहे थे।

भारत सरकार को भेजी रिपोर्ट, ओडीएफ हुआ गांव : जनपद पंचायत सीईओ राघौगढ़ हेमलता शर्मा ने भारत सरकार को भी गलत आंकड़े भेज दिए हैं। इसमें इस गांव को ओडीएफ बताया गया है। जब उसने मोबाइल पर इस मामले में पूछा तो फोन काट दिया।

फर्जी रिपोर्ट की पोल खुली
टोडरा ग्राम पंचायत के गांव देवीपुरा में 32 शौचालय हैं, लेकिन इस्तेमाल किसी का भी नहीं होता है
जनपद सीईओ ऑफिस की बजाय घर से करती हैं काम
राघौगढ़ जनपद के बुरे हाल हैं, जनपद सीईओ ऑफिस भी नहीं आती हैं। लोगों से भी नहीं मिलती हैं। जनपद के कर्मचारी भी किसी फाइल के सिलसिले में उनके बंगले पर ही जाकर मिलते हैं। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।

एसडीएम ने कहा-सीईओ की जिम्मेदारी, हम क्या करें
एसडीएम अत्येंद्र सिंह से फर्जी ओडीएफ के बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी जनपद सीईओ की है। इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।

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