भास्कर संवाददाता|पोड़ी-उपरोड़ा
जिले के अंतिम छोर में बसे गांव की खराब सड़कों में सुधार के लिए पीडब्ल्यूडी को 112 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली है। इससे चोटिया, चिरमिरी मार्ग की मरम्मत की जाएगी। दो जिलों को जोड़ने वाली इस सड़क पर अभी भारी वाहनों का दबाव कम है। आगे दबाव बढ़ सकता है।
दो जिलों को जोड़ने वाली सड़कों की हालत काफी खराब है। सड़कों को सुधारने के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट में सुधार के लिए प्रावधान किया गया है। शासन ने ऐसी सड़कों के लिए प्राक्कलन तैयार करने का निर्देश दिया है, जो दूसरे जिले को जोड़ती हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, कोरिया, सरगुजा, सूरजपुर से लगे सड़क मार्ग में सुधार के लिए प्राक्कलन तैयार कर लिया गया है। अलग-अलग जगह से सड़क की हालत में सुधार की जरूरत है। चोटिया से पोंड़ीखुर्द, रोदे, कोरबी, झिनपुरी, बूढ़ापारा, कुलहरिया, पाली, दुल्लापुर मोड़ जिले में आता है। इसके बाद कोरिया जिला शुरू होता है। चोटिया से एक से चार व 19 से 20वें किलोमीटर के बीच का मार्ग अधिक खराब है। जिले के अंतिम छोर में बसे लोग कोरिया के चिरमिरी व बैकुंठपुर जैसे शहरों पर निर्भर हैं। कॉलरी क्षेत्र होने से भारी वाहनों का मार्ग में आना-जाना लगा रहता है। इसके चलते ही यह रोड जल्द खराब हो जाती है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में बजट के लिए किया गया प्रावधान
जर्जर हो चुकी सड़क से गुजरते भारी वाहन। उड़त रही धूल।
सड़क किनारे से सोल्डर हो रहे गायब,हादसे की रहती आशंका
वन क्षेत्र से होकर निकलने वाली सड़क में निर्माण संबंधी कई तरह की अनियमितता बरती गई हंै। ज्यादातर जगहों में मिट्टी कटाव से सड़क जर्जर हुई हैं। सड़क किनारे नाली का निर्माण नहीं कराया गया था। जिसके कारण तेजी से मिट्टी का कटाव होता है। साथ ही पीडब्ल्यूडी सड़क किनारे सोल्डर बनाने में भी ध्यान नहीं देता है। सड़क बनाने के दौरान ठेकेदार के इन कमियों को छोड़ने के कारण जहां निर्धारित समय सीमा पूरी करने से पहले ही सड़क जर्जर खराब हो जाती है। वहीं अक्सर जर्जर सड़क होने के कारण ही हादसे भी होते हैं। जिसमें जानमाल का नुकसान होता है।
ग्रामीणों को आवागमन के लिए बस ही हैं एकमात्र साधन
सड़क की दशा खराब होने से कम दूरी वाले गांवों को जोड़ने के लिए यात्री बसों की समस्या है। ज्यादातर लंबी दूरी तय करने वाली बस ही मार्ग में चलती है। इसमें सामान्य दूरी वाले यात्रियों को आवामन में परेशानी होती है। सड़क की दशा में सुधार होने से कम दूरी की बसें बढ़ सकती है। वहीं जिन ग्रामीणों के पास निजी वाहन हैं। वह इन जर्जर सड़क पर चलाते हैं। इसके चलते वाहन भी समय से पहले ही जर्जर हो जाते हैं। ऐसे में सड़क खराब
होने का खामियाजा ग्रामीणों को कई तरह से भुगतना पड़ रहा है।