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पिछड़ों को आगे बढ़ाने में बाबा की महती भूमिका

3 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर जमशेदपुर

अंतरराष्ट्रीय संताल परिषद ने शुक्रवार को एसएनटीआई बिष्टुपुर में भारत र| बाबा साहेब डा. भीमराब अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परिषद की ओर से पद्मश्री से पुरस्कृत प्रो. दिगंबर हांसदा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथि असम के पूर्व स्पीकर पृथ्वी माझी, श्रवण काबरा चेंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य, देवेन्द्र नाथ चंपिया, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, सीएसआर के सचिव जीरेन टोपना, संत मेरीज हाई स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल फादर डेविड, आईआरएस के रिटायर्ड यूएन माझी एवं कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शुक्ला मोहंती आदि मौजूद थीं।

इस दौरान पृथ्वी माझी ने कहा कि हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि अम्बेडकर जैसे महापुरूष का जन्म हमारे देश में हुआ।उनकी वजह से ही हमारे देश की सामाजिक व्यवस्था का निर्माण हुआ है। आदिवासियों के उत्थान में ओलचिकी के निर्माता पंडित रघुनाथ मुर्मू का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अगर वे नहीं होते तो आदिवासी समाज का विनाश हो गया रहता। इन्होंने ओलचिकी का निर्माण कर हमारी संस्कृति और परंपरा को बचाकर इसे पुन: जीवित किया है। प्रो. दिगंबर हांसदाा ने संताली समाज के संस्कृति और परंपरा को संजोने के लिए जो महत्वपूर्ण कार्य किया है, इसके लिए भारत सरकार ने उसके लिए पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। आईआरएएस के रिटायर्ड यूएन माझी ने कहा संताली समाज का ऐसा कोई शिक्षक नहीं होगा, जो हांसदा से नहीं पढ़ा होगा। शुक्ला मोहंती ने कहा कि यह जमशेदपुर व झारखंड के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। जो दिगंबर हांसदा ने संविधान को अनुवाद संताली भाषा में किया है। इससे संताली संमाज के सभी लोगों को अपने संविधान में उल्लेखित अनुच्छेदों केे बारें में अच्छे से जानकारी होगी। जिससे वे अपने हक -अधिकार और देश के हित के बारें सोच पाएंगे। इससे पहले कार्यक्रम की शुरूआत बाबा साहेब के तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।

एसएनटीआई सभागार में प्रो. दिगंबर हांसदा सम्मानित
एसएनटीआई सभागार में प्रो. दिगंबर हांसदा को सम्मानित करतीं केयू की कुलपति डॉ. शुक्ला मोहंती।

सिटी रिपोर्टर जमशेदपुर

अंतरराष्ट्रीय संताल परिषद ने शुक्रवार को एसएनटीआई बिष्टुपुर में भारत र| बाबा साहेब डा. भीमराब अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परिषद की ओर से पद्मश्री से पुरस्कृत प्रो. दिगंबर हांसदा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथि असम के पूर्व स्पीकर पृथ्वी माझी, श्रवण काबरा चेंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य, देवेन्द्र नाथ चंपिया, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष, सीएसआर के सचिव जीरेन टोपना, संत मेरीज हाई स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल फादर डेविड, आईआरएस के रिटायर्ड यूएन माझी एवं कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शुक्ला मोहंती आदि मौजूद थीं।

इस दौरान पृथ्वी माझी ने कहा कि हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि अम्बेडकर जैसे महापुरूष का जन्म हमारे देश में हुआ।उनकी वजह से ही हमारे देश की सामाजिक व्यवस्था का निर्माण हुआ है। आदिवासियों के उत्थान में ओलचिकी के निर्माता पंडित रघुनाथ मुर्मू का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अगर वे नहीं होते तो आदिवासी समाज का विनाश हो गया रहता। इन्होंने ओलचिकी का निर्माण कर हमारी संस्कृति और परंपरा को बचाकर इसे पुन: जीवित किया है। प्रो. दिगंबर हांसदाा ने संताली समाज के संस्कृति और परंपरा को संजोने के लिए जो महत्वपूर्ण कार्य किया है, इसके लिए भारत सरकार ने उसके लिए पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। आईआरएएस के रिटायर्ड यूएन माझी ने कहा संताली समाज का ऐसा कोई शिक्षक नहीं होगा, जो हांसदा से नहीं पढ़ा होगा। शुक्ला मोहंती ने कहा कि यह जमशेदपुर व झारखंड के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। जो दिगंबर हांसदा ने संविधान को अनुवाद संताली भाषा में किया है। इससे संताली संमाज के सभी लोगों को अपने संविधान में उल्लेखित अनुच्छेदों केे बारें में अच्छे से जानकारी होगी। जिससे वे अपने हक -अधिकार और देश के हित के बारें सोच पाएंगे। इससे पहले कार्यक्रम की शुरूआत बाबा साहेब के तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।

संताली का कोई शिक्षक नहीं जिसे डॉ. हांसदा ने न पढ़ाया हो
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