गेम खेलने के काम आ रहे थाने में रखे कंप्यूटर स्टाफ का तर्क- हमें नहीं आता चलाना
चरणजीत सिंह जमशेदपुर
शहर के थानों में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने व इंफॉर्मेश अपडेट करने की कवायद शुरू हुई थी। इसके लिए जमशेदपुर समेत राज्य में करोड़ों रुपए खर्च कर सभी थाने में कंप्यूटर लगाए गए थे। लेकिन पुलिस कर्मचारियों को दक्ष नहीं किया गया। लिहाजा ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराने का काम बंद है। ज्यादातर थाने में मैन्युअल एफआईआर दर्ज हो रहे हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक जवान ने कहा- भाई मुझे अंग्रेजी नहीं आती, इसलिए कंप्यूटर ऑपरेट करना मेरे वश की बात नहीं है। ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने के लिए प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। कई तरह की तकनीकी अड़चनों के कारण लगाए गए कंप्यूटर सिस्टम थाने की शोभा बढ़ा रही है। हां यह जरूर हुआ कि इन कंप्यूटर पर कुछ सरकारी कामकाज के अलावा कई जगह जवान ताश के पत्ते खेलते हैं तो कई थानों में कंप्यूटर ढंक कर रखे गए हैं। थाना में कंप्यूटर संचालन के लिए विभाग के पास दक्ष कर्मियों की कमी है। उन्हें हिंदी टाइपिंग करने में कठिनाई होती है। ज्यादातर पुलिसकर्मी अधेड़ होने की वजह से कंप्यूटर की ट्रेनिंग में परेशानी हो रही है। कुछ जानकार हैं भी तो उनसे मुख्यालय में काम लिया जाता है। जरुरत होने पर उन्हें संबंधित थाना बुलाया जाता है।
DB Star concern
96-97 से हो रहा कंप्यूटर में काम
बताया जाता है कि 1996-97 के दौरान ही पुलिस मुख्यालय में कंप्यूटर का इस्तेमाल होने लगा था। तब प्रत्येक थाना का डाटा सीसीटीएनएस सेक्शन (क्राइम कंट्रोल ट्रेकिंग नेटवर्किंग सिस्टम) जो कि मुख्यालय में था वहीं अपडेट होता था। धीरे-धीरे आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक थाना का रिकार्ड उसी थाना में रखा जाने लगा। जिस कारण कंप्यूटर लगाए गए।
कुछ जवानों को हिंदी टाइपिंग में भी कठिनाई होती है
सोनारी थाने में दर्ज होती है आनलाइन एफआईआर
सोनारी थाने में सबसे पहले तकरीबन एक साल पहले ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। फिलहाल ऑनलाइन केस जिला पुलिस मुख्यालय (एसएसपी ऑफिस) पहुंचते हैं। यहां से सर्वर के जरिए संबंधित थानों को मामला रेफर किया जाता है।
डाटा नहीं हो पाता है सिंक
सीसीटीएनएस के तहत सभी थानों में बीएसएनएल को ही इंटरनेट सुविधा दी गई है। अक्सर थाना पुलिस शिकायत करते हैं कि कनेक्टिविटी की प्रॉब्लम है, जिसकी वजह से एफआईआर व अन्य डाटा सिंक नहीं हो रहा है। कंप्यूटर में एफआईआर टाइप तो हो जाती है, लेकिन सिंक नहीं होती है। जिसकी वजह से कई बार वादी को भी तुरंत एफआईआर की कॉपी नहीं मिलती है।
ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने में लग जाते हैं चार दिन
तीन साल पहले थाने को कंप्यूरीकृत करने का काम शुरू हुआ था। शहर समेत जिले का थाना हाईटेक हो चुका है। लेकिन पुलिस कर्मियों को दक्ष करना भूल गए। आलम यह है कि कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं होता है। तत्काल एफआईआर दर्ज करने में परेशानी होती है। सेकंड में काम होने की बजाय ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने में पुलिस कर्मियों को तीन से चार दिन लग जाते हैं। विभाग के वरीय अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक थाने में अनुभवी पुलिसकर्मी हैं। समय-समय पर जवानों को ट्रेनिंग दी जाती है।
 थाना में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज होती है। उसकी रिसीविंग फरियादी को तत्काल मिलती है, लेकिन प्रक्रिया तब आगे बढ़ती है जब शिकायतकर्ता थाना पहुंचे और हस्ताक्षर करे। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं। थाना में कंप्यूटराइज्ड और हस्तलिखित आवेदन लिए जाते हैं। अगर फरियादी गरीब है वह इच्छुक है तो उसका आवेदन टाइप भी कराया जाता है। अनूप बिरथरे, एसएसपी, जमशेदपुर