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हर स्कूल में फिल्म दिखाई जाए, ताकि बच्चे रामदयाल मुंडा जैसा बनने की सोचंे

3 वर्ष पहले
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जमशेदपुर/ रांची 65वें नेशनल अवॉर्ड की घोषणा के साथ ही झॉलीवुड में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। झारखंड के प्रसिद्ध फिल्मकार मेघनाथ और बीजू टोप्पो की फिल्म ‘नाची से बांची’ को बेस्ट बायोग्राफिकल-हिस्टोरिकल रीकंस्ट्रक्शन कैटेगरी में अवॉर्ड दिए जाने की घोषणा हुई। यह फिल्म पद्मश्री रामदयाल मुंडा के जीवन और उनके योगदान पर आधारित है। झारखंड की यह पहली फिल्म है, जिसे फिल्म्स डिवीजन ऑफ इंडिया ने प्रोड्यूस किया है। ज्ञात हो कि इस जोड़ी को 2010 में उनकी दो फिल्मों ‘आइरन इज हॉट’ और ‘एक रोपा धान’ के लिए दो नेशनल अवॉर्ड मिले हैं। अभी तक उन्हें दो दर्जन फिल्मों के लिए नेशनल-इंटरनेशनल अवार्ड मिल चुके हैं। अपने प्रदेश में हमारी फिल्मों को दिखाने का कोई प्रबंध नहीं। दूसरी जगहों पर वहां के मुख्यमंत्री फिल्में देखने आते हैं, डॉक्यूमेंट्री फिल्में देखने 500 से हजार लोग हर दिन आते हैं। हमारे प्रदेश में टैलेंटेड फिल्मकार है, उनमें विजन है, लेकिन सरकार से कोई सपोर्ट नहीं मिलने से हमारी मेहनत को हमारे लोग ही नहीं देख सकते। ताज्जुब तो तब होती है, जब सब्सिडी वाली फिल्मों को सरकार ही झारखंडी फिल्म नहीं बोल पा रही है। पिछले साल गोवा और झारखंड सरकार के बीच मिलकर फिल्म दिखाने की बात हुई।

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