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एमजीएम में जरूरत की मात्र 35% दवा, 57% बाहर से खरीदते हैं

3 वर्ष पहले
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डीबी स्टार जमशेदपुर

एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक व विभागाध्यक्षों की शिथिलता की वजह से यहां आने वाले हर दूसरे मरीज को दवा नहीं मिलती है। अस्पताल में हर महीने औसतन 35 हजार मरीज आते हैं, जिनमें 15 हजार (लगभग 43 फीसदी) को कुछ दवा ही मिलती है। अस्पताल के डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, उनमें अधिकतर बाहर से खरीदनी पड़ती है। अस्पताल में 172 प्रकार की दवा होनी चािहए, लेकिन मात्र 60 प्रकार की ही दवा उपलब्ध है। यानि अस्पताल में मरीजों के लिए मात्र 35 फीसदी दवा उपलब्ध है।

इस बात की पुष्टि हाल के दिनों में अस्पताल के ऑडिट में हुई है। इस स्थिति के िलए अस्पताल अधीक्षक और विभागाध्यक्षों ने समय पर दवा खरीद की प्रक्रिया पूरी नहीं होने का कारण गिनाया हैै। इसकी जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे ने तत्काल अस्पताल स्तर पर होने वाली दवा खरीद पर रोक लगाते हुए विभाग के कॉरपोरेशन से दवा लेने का आदेश दिया। साथ ही एक साल में विभागवार कौन-कौन सी दवा की कितनी खपत होती है, इसका प्रस्ताव देने का निर्देश दिया है। एमजीएम अस्पताल अधीक्षक को हर स्थिति में मरीज को दवा उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। जिम्मेदारों के उदासीन रवैये के कारण एमजीएम आने वाले मरीजों को काफी परेशानी होती है।

1 साल में विभागवार कौन-कौन सी दवा की कितनी खपत होती है
एक माह में मरीजों की औसतन संख्या 35000
कितने तरह की दवा रहती है

60
कितनी तरह की दवा होनी चाहिए- 172
कितने मरीजों को नहीं मिलती है दवा- 20000
अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने की वजह
कॉरपोरेशन से दवा आपूर्ति होने पर अस्पताल संचालन में होगी सुविधा
 अस्पताल में जो फंड दवा के लिए आता है, उससे खरीदारी होती है। नियम के तहत खरीदारी करने में थोड़ी देरी होती है, जिससे कभी-कभी मरीजों को परेशानी होती है। कॉरपोरेशन द्वारा पिछले साल भी सालभर में दवा की खपत का प्रस्ताव मांगा गया था, लेकिन डिमांड के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो सकी थी। अभी आपात स्थिति में स्थानीय स्तर पर दवा की खरीद होती थी। इस पर भी रोक लग गई है। कॉरपोरेशन की ओर से सभी दवा की आपूर्ति होने से मरीजों के साथ अस्पताल संचालन में सुविधा होगी, क्योंकि इससे खरीदारी की प्रक्रिया में लगने वाले समय की बचत होगी।  डॉ नकुल चौधरी, उपाधीक्षक, एमजीएम अस्पताल

अस्पताल में हर महीने एमजीएम में आते हैं औसतन 35 हजार मरीज, 15 हजार मरीजों को मिलती है कुछ दवाइयां
अस्पताल स्तर पर अधीक्षक, विभागाध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव व टेंडर प्रक्रिया पूरी करने में देरी

एमजीएम अस्पताल

10 अप्रैल तक देना था प्रस्ताव, तीन दिन बाद भी डाटा तैयार नहीं हो सका
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एमजीएम अस्पताल प्रबंधन से विभागवार खपत होने वाली दवा के बारे में प्रस्ताव 10 अप्रैल तक सौंपने को कहा गया था। लेकिन अस्पताल अधीक्षक व विभागाध्यक्षों की शिथिलता की वजह से 13 अप्रैल तक प्रस्ताव तैयार नहीं हो सका था। वर्तमान में एमजीएम अस्पताल में हर माह लगभग 50 हजार पैरासिटामोल, विभिन्न तरह के 40 हजार एंटीबायोटिक टैबलेट-इंजेक्शन, 6 हजार स्लाइन समेत लगभग 8 लाख रुपए की दवा की खपत होती है। इसके बाद भी मरीजों को अधिकतर दवा बाहर से खरीदनी पड़ती है।

कॉरपोरेशन से मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होना

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