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जून से एमजीएम में स्किन के लेजर ट्रीटमेंट की सुविधा, शरीर पर नहीं दिखेगा निशान

3 वर्ष पहले
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बात चाहे कील-मुंहासे हटाने की हो या स्किन में आए बड़े-बड़े गांठों की, एमजीएम अस्पताल में इनके इलाज के लिए जल्द लोगों को चीर-फाड़ वाले ऑपरेशन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। जून से इनका इलाज लेजर ट्रीटमेंट से होगा। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन सीओ-2 लेजर मशीन मंगवाया रहा है। मई के दूसरे सप्ताह में मशीन आने की उम्मीद है। इंस्टालेशन व ट्रायल के बाद मरीजों को इस मशीन का लाभ मिलने लगेगा। सीओ-2 मशीन 17 लाख रुपए में खरीदी जाएगी। सप्लाई करने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों ने एमजीएम के डॉक्टरों के सामने मशीन का डेमो भी दिया है। डॉक्टरों को मशीन की कार्यप्रणाली और इसके फायदे बताए गए।

उपकरण खरीदने का प्रस्ताव

स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर एमजीएम अस्पताल में मोतियाबिंद ऑपरेशन शुरू करने को लेकर शुक्रवार को अस्पताल अधीक्षक डॉ बी. भूषण, नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ एमएम जमला की स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों के साथ बैठक हुई। विभाग द्वारा जल्द सेवा शुरू करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन विभागाध्यक्ष ने वर्तमान ओटी में ऑपरेशन करने से इनकार किया। ऐसे में अधिकारियों ने अधीक्षक व एचओडी को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लायक ओटी तैयार करने में होने वाले खर्च का प्रस्ताव देने का निर्देश दिया। डॉ जमला ने वर्तमान ओटी को विभाग के दूसरे कमरे में शिफ्ट कर लेजर समेत कई उपकरण खरीदने का प्रस्ताव दिया है।

मरीजों को यह होगा लाभ

चीर-फाड़ की प्रक्रिया से मिलेगी मुक्ति ऑपरेशन के दौरान दर्द भी नहीं होगा। त्वचा पर निशान नहीं रहेगा। लेजर किरणों से ऑपरेशन में काफी कम समय लगेगा।

सीओटू लेजर मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरु हो गई है। इससे स्किन से जुड़ी बीमारियों के इलाज में सुविधा होगी। डॉ भारतेंदु भूषण, अधीक्षक

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