पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Jharkhand
  • Jamshedpur
  • हाईवे ने हड़पी हरियाली, 13 हजार पेड़ काटे; पूर्वी सिंहभूम में एक वर्ग किमी जंगल घटा

हाईवे ने हड़पी हरियाली, 13 हजार पेड़ काटे; पूर्वी सिंहभूम में एक वर्ग किमी जंगल घटा

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में खुलासा

पूर्वी सिंहभूम में 1076 वर्ग किमी में जंगल है, अब 3 वर्ग किमी जंगल बढ़ा था

अश्विनी रघुवंशी जमशेदपुर

दो साल में झारखंड में 29 वर्ग किमी जंगल बढ़ा है लेकिन पूर्वी सिंहभूम में एक वर्गकिमी में जंगल घट गया। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा सेटेलाइट से किए गए सर्वे में यह खुलासा हुआ। पूर्वी सिंहभूम का क्षेत्रफल 3562 वर्ग किमी है। इसमें 1076 वर्ग किमी में जंगल हैं। 3 साल पहले 2015 में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने गणना की थी तो पूर्वी सिंहभूम में 3 वर्ग किमी जंगल बढ़ गया था। भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 2 साल तक फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से सेटेलाइट सर्वेक्षण कराया। जो पेड़ घने हो चुके हैं, गोलाकार तरीके से फैल चुके हैं, सेटेलाइट सर्वे में वही चिह्नित हुए हैं। सेटेलाइट से हुए सर्वे का निष्कर्ष यह है कि जिले में 30.21 फीसदी जमीन पर जंगल है। झारखंड प्रदेश के फॉरेस्ट सेंसस में यह बात आई कि वन भूमि में 23553 वर्ग किमी भूमि पर जंगल है। पूरे झारखंड के आंकड़ों के मुताबिक कुल क्षेत्रफल में 33.21 प्रतिशत में जंगल है। प्रति व्यक्ति 0.08 हेक्टेयर में जंगल है। राष्ट्रीय उच्च पथ 33 में महुलिया से बहरागोड़ा तक तकरीबन 50 किमी की दूरी में सड़क के दोनों तरफ 13 हजार पेड़ काटे गए हैं। ये पेड़ 30 से 50 साल पुराने थे। एनएचएआई ने 22 हजार पेड़ काटने के लिए अनुमति मांगी थी। मगर वन विभाग ने सिर्फ 13 हजार पेड़ काटने की स्वीकृति दी। इसके बदले नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया को नेशनल हाईवे के किनारे 44 हजार पेड़ लगाने है।

सड़क चौड़ीकरण में कटे पेड़

टाटानगर के कंपनी एरिया में पिछले दो साल में सड़क के चौड़ीकरण का काम तेजी से हुआ। इसमें तकरीबन 200 पेड़ काटे गए। नीलडीह इलाके में जो पेड़ थे, वे 50 साल से भी अधिक उम्र के थे। कंपनी एरिया की सड़कों को चौड़ी करने में अधिकतर पुराने पेड़ काटे गए हैं जो घने थे। पथ निर्माण विभाग की कई सड़कों के निर्माण में भी पेड़ों की कटाई हुई है।

 पूर्वी सिंहभूम में एक वर्ग किमी जंगल कम हुआ। इसके कई कारण हैं। दो साल में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है। मगर अभी वे पौधे पेड़ का स्वरूप नहीं ले सके हैं। दो साल के भीतर पौधे पेड़ बन जाएंगे तो फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया में पूर्वी सिंहभूम का ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर जाएगा।  सबा आलम अंसारी, डीएफओ, पूर्वी सिंहभूम

खबरें और भी हैं...