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उम्मीदवारों ने कहा- प्रशासन तय करे वोटर लिस्ट एसडीओ बोलीं- 48 घंटों में आपसी सहमति बनाएं

3 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर | जमशेदपुर

सीजीपीसी प्रधान पद के चुनाव को लेकर दोनों गुटों ने एसडीओ माधवी मिश्रा से अलग- अलग मुलाकात कर प्रशासन द्वारा तय की गई मतदाता सूची को मानने की बात कही। लेकिन एसडीओ ने दोनों गुट के नेताओं को दो टूक शब्दों में कहा- प्रशासन किसी स्थिति में मतदाता सूची का निर्धारण नहीं करेगा। दोनों पक्ष आपसी सहमति से मतदाता सूची तैयार कर प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद प्रशासन चुनाव के दौरान विधि- व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंतजाम करेगा। इसके लिए उन्होंने 48 घंटे की मोहलत दी है।

मालूम हो कि मतदाताओं की संख्या को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद की स्थिति है। इस कारण नामांकन के बाद भी चुनाव की तिथि का एेलान संयोजक द्वारा नहीं किया जा रहा है। मतदाता सूची को लेकर शुक्रवार को मिंदी गुट ने एसडीओ से भेंट की थी। शनिवार को गुरमुख सिंह मुखे अपने खास समर्थकों के साथ एसडीओ से मिलने पहुंचे थे।

दोनों गुटों के 15 लोगों पर धारा-107 के तहत होगी कार्रवाई

प्रधान चुनाव में बार-बार हंगामा को रोकने के लिए साकची पुलिस ने दोनों गुटों के 15 लोगों के खिलाफ 107 के तहत कार्रवाई की अनुशंसा एसडीएम माधवी मिश्रा से की है। एसडीएम कोर्ट से इन लोगों के खिलाफ सोमवार का नोटिस जारी किया जाएगा। जारी नोटिस के आलोक में हुड़दंग मचाने वाले अपने अधिवक्ता के मार्फत एसडीएम कोर्ट में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बांड भरेंगे। इसके बाद किसी तरह का हंगामा होने पर पुलिस को हुड़दंगियों के खिलाफ कार्रवाई करने में आसानी होगी।

यह है मामला

सीजीपीसी प्रधान पद के उम्मीदवार हरमिंदर सिंह मिंदी 147 वोटरों की सूची पर अड़े हैं, जबकि मुखे 156 वोटरों की सूची पर। अगर मुखे जेम्को गुरुद्वारा के सात वोट छोड़ने को तैयार भी होते हैं, तो सिख स्त्री सत्संग सभा व सीतारामडेरा के दो वोट को जोड़ने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में वोटरों की संख्या 151 तक पहुंच जाती है।

अगस्त-2017 में होना था चुनाव

सीजीपीसी प्रधान पद के लिए अगस्त-2017 में होने वाला चुनाव विवादों से घिरकर नौ माह बाद भी नहीं हो सका है। चुनाव कन्वेनर चुने जाने के बाद जो उम्मीद जगी थी, वह भी धरी रह गई है। कन्वेनर पर भी इंदरजीत सिंह गुट के उम्मीदवार हरमिंदर सिंह मिंदी ने पक्षपात का आरोप लगाना शुरू कर दिया है। यही हाल कन्वेनर हरनेक सिंह के कार्यकाल में हुई थी। तब उम्मीदवार गुरमुख सिंह मुखे और उनके समर्थक पक्षपात का आरोप लगाया करते थे। इसे लेकर समाज के लोगों को सड़क पर उतरना पड़ा था।

साकची से दो वोटरों के नाम काटे जाने में नया मोड़

शुक्रवार को सीजीपीसी की वोटरलिस्ट से साकची के तीन पदाधिकारियों को बाहर किए जाने के मामले में नया मोड़ आया है। रवींदर सिंह भाटिया ने हरभजन सिंह पप्पू और राजीव अरोड़ा का नाम हटाने पर एसडीओ से शिकायत की थी। लेकिन हरभजन सिंह पप्पू ने कहा- विदेश दौरे को लेकर उन्होंने खुद प्रधान को पत्र लिख दूसरे व्यक्ति का नाम जोड़ने को कहा था।

शैलेंद्र-मुखे के हाथ का खिलौना हैं दल्ली

चुनाव संयोजक दलजीत सिंह शैलेंद्र सिंह एवं गुरमुख सिंह के हाथ का खिलौना हैं। विरोधियों को दबाने के लिए ही शैलेंद्र एवं मुखे ने चुनाव संचालन समिति का गठन दल्ली से करवाया। बनी बात को बिगाड़ने के लिए सरदार पूरन सिंह एवं अमरजीत सिंह को रखा हुआ है। अमरजीत सिंह बरेली गुरुद्वारा कमेटी के डिफॉल्टर हैं। शैलेंद्र सिंह भी गुरु घर के देनदार हैं। हरमिंदर सिंह मिंदी

इनके खिलाफ अनुशंसा

गुरमुख सिंह मुखे, चुनाव संयोजक दलजीत सिंह, महिन्दर सिंह, सुरजीत सिंह, हरमिंदर सिंह मिंदी, राजू सिंह, सतवीर सिंह सोमू, हरनेक सिंह, इंदरजीत सिंह, पूरण सिंह, हरदयाल सिंह, महेंद्र सिंह, अमरजीत सिंह, सोहण सिंह व हरविंदर सिंह।

मिंदी ने गुरुद्वारा के नाम जमीन हड़पी

हरमिंदर सिंह मिंदी ने हाइवे में गुरुद्वारा के नाम से जमीन लेकर हड़प लिया है। मिंदी पिछले कुछ वर्षों में जमीन माफिया के रूप में उभरे हैं। जमीन को लेकर मिंदी ने दो समुदायों को अपने स्वार्थ के लिए लड़वाने की पूरी तैयारी कर ली थी। मिंदी में क्षमता नहीं है कि कोई निर्णय खुद ले सकें। गुरमुख सिंह मुखे

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