पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Jharkhand
  • Jamshedpur
  • भूषण स्टील की खान के लिए क्लियरेंस लेना होगा : कुलवीन

भूषण स्टील की खान के लिए क्लियरेंस लेना होगा : कुलवीन

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
31 साल पहले भूषण स्टील लिमिटेड की औद्योगिक यात्रा दिल्ली के नजदीक साहिबाबाद में जवाहर मेटल्स के अधिग्रहण से शुरू हुई। यह अधिग्रहण भूषण स्टील लिमिटेड के लिए जवाहर की खदान जैसा साबित हुआ। महज 30 साल के भीतर भूषण स्टील ने साहिबाबाद, महाराष्ट्र के खोपोली और ओड़िशा के अंगुल में 5.6 मिलियन टन के अत्याधुनिक स्टील प्लांट की स्थापना कर ली। टाटा स्टील कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन के चीफ कुलवीन सुरी ने कहा कि टाटा स्टील को भूषण स्टील के खान के लिए क्लियरेंस लेना होगा।

कोल्ड रोलिंग स्टील के उत्पादन में पहचान बनाई, कोटेड स्टील और ट्यूब के निर्माण में भी भूषण स्टील ने कम समय में खुद को स्थापित किया। लेकिन ओड़िशा के सुंदरगढ़ जिले के कलमोंग पश्चिम आयरन ओर खदान को पाने के लिए नीलामी में ऊंची बोली लगा दी।

अत्यधिक बोली लगा कर आयरन ओर खदान पाने का मकसद यही था कि भूषण स्टील का परचम और तेज गति से लहराएगा। उसी आयरन ओर खदान ने आखिरकार तगड़ा झटका दे दिया।

हालत यह हो गई कि भूषण स्टील लिमिटेड बैंकों से लिए गए कर्ज को वापस करने की हालत में नहीं रही। 2018 में टाटा स्टील ने भूषण स्टील का अधिग्रहण कर लिया सिर्फ 35 हजार करोड़ रुपए में। आयरन ओर की खदान भी भूषण स्टील लिमिटेड की है। सरकार से अनुमति लेने के बाद टाटा स्टील उस खदान का भी उपयोग करेगी।

भूषण स्टील का फर्श से अर्श का सफर

1987 : भूषण स्टील लिमिटेड ने साहिबाबाद में जवाहर मेटल्स का अधिग्रहण किया था। तभी एक और स्टील कंपनी की बुनियाद पड़ी थी।

1990 से 1992 : साहिबाबाद में कोल्ड रोलिंग मिल (सीआरएम) की स्थापना का काम किया गया।

2003 से 2006 : भूषण स्टील लिमिटेड ने महाराष्ट्र के खपोली में स्टील, ट्यूब और पावर प्लांट लगाया।

2004 से 2007 : ओड़िशा में स्टील प्लांट की स्थापना।

2007 से 2010 : ओड़िशा में ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर एवं हॉट स्ट्रीप मिल लगाया गया। खोपोली व साहिबाबाद में कोटिंग लाइन लगी।

2010 से 2013 : ओड़िशा में तीसरे चरण का विस्तारीकरण किया गया।

2014 से 2015 : साहिबाबाद प्लांट में भी विस्तारीकरण किया गया।

भूषण स्टील बैंकों के कर्ज का भुगतान नहीं कर पा रही थी। टाटा स्टील ने एकमुश्त 18 हजार करोड़ रुपए जमा किए। बाकी रकम धीरे-धीरे बैंकों को देगी। कुल 35 हजार करोड़ रुपए में भूषण स्टील का अधिग्रहण किया गया है। भूषण स्टील को ओड़िशा में आयरन ओर खान भी मिली है। टाटा स्टील अभी उस खदान का संचालन नहीं कर सकती। इसे चलाने के लिए सरकार से क्लियरेंस लेना होगा। कुलवीन सुरी, चीफ, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन

खबरें और भी हैं...