टेल्को वर्कर्स यूनियन की वैधता पर सोमवार 21 मई को झारखंड हाईकोर्ट के वेकेशन बेंच में लंबी सुनवाई हुई। दो पाली में हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब कोर्ट इस पर अपना फैसला 25 मई को देगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले पर वेकेशन कोर्ट में सुनवाई करने का फैसला लिया था। इस मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर चार में हुई।
वेकेशन बेंच की पहली पाली में जस्टिस आर.मुखोपाध्याय और जस्टिस आनंद सेन जबकि दूसरी पाली में जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस अनुराधा रायचौधरी थी। टेल्को वर्कर्स यूनियन के तोते गुट के अधिवक्ता इन्द्रजीत सिन्हा और सुमित गाडोरिया जबकि प्रकाश गुट के वकील राजीव रंजन और मनीष कुमार थे। उल्लेखनीय है कि 18 मई को इस मामले पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में सुनवाई हुई थी। यह बहस दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक चली। सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के नेता मौजूद थे। तोते गुट की ओर से गुरमीत सिंह तोते, आरके सिंह, प्रवीण सिंह, अनिल शर्मा और संतोष सिंह जबकि प्रकाश कुमार गुट की ओर से डीडी महंती, मिथाइस कुजूर, महेश तिवारी, प्रेम कुमार, डीके सिंह,जसवंत सिंह, रूद्र प्रताप सिंह और सतीश मिश्रा शामिल थे।
यूनियन की आम सभा और निबंधन संख्या पर हुई जोरदार बहस
टेल्को वर्कर्स यूनियन की वैधता मामले में यूनियन की आम सभा की वैधता से लेकर निबंधन संख्या पर दोनों पक्ष के वकीलों ने अपना पक्ष रखा। तोते गुट के वकील ने कोर्ट को बताया कि अगस्त 2015 में जिला प्रशासन की देखरेख में कैसे इस यूनियन का गठन हुआ। लेकिन यूनियन गठन के कुछ ही दिन बाद आपसी लड़ाई की वजह से यूनियन में विभाजन हो गया। उन्होंने तोते गुट की ओर से कराये गये आम सभा को वैध बताया और कहा कि इसे झारखंड के रजिस्ट्रार ने भी वैध बताया है। लेकिन विरोधी खेमे के वकील ने कहा कि तोते गुट को आम सभा करने का कोई अधिकार नहीं था और उसने गलत तरीके से आम सभा करायी। तोते गुट के वकील ने यूनियन की निबंधन संख्या पर सवाल उठाया और कहा कि 98 संख्या को एक ट्रान्सपोर्ट कंपनी को आबंटित कर दिया गया है। इस पर प्रकाश गुट के वकील ने बताया कि टेल्को वर्कर्स यूनियन के साथ टाटा वर्कर्स यूनियन के निबंधन को भी खत्म कर दिया गया था, लेकिन वहां पर तो यह समस्या नहीं आई। इसके पहले पहली पाली में प्रकाश कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर स्पेशल लीव पिटिशन पर भी बहस हुई, जिसमें इंटरलोकेटरी एप्लीकेशन (आईए) के जरिए यूनियन चुनाव पर लगाये गये रोक को हटाने और खाते को डिफ्रीज करने की मांग की गई थी।