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कोल्हान के कॉलेजों में कमीशन का खेल भवन बनते ही अधिकांश में आई दरार

3 वर्ष पहले
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डीबी स्टार जमशेदपुर

दो साल पहले को-ऑपरेटिव कॉलेज में सात करोड़ की लागत से भवन बनाया गया था। वहीं छह माह पहले वर्कर्स कॉलेज में 47 लाख रुपए खर्च कर भवन की मरम्मत कराई गई थी। लेकिन दोनों कॉलेज में भवन की स्थिति जर्जर हो गई है। दीवार दरकने लगी है। छत से पानी रिसता है। इसके कोल्हान विवि से संबद्ध दूसरे कॉलेजों की भी हालत अच्छी नहीं है। हाल के वर्षों में हुए भवन निर्माण में लगातार लापरवाही का मामला प्रकाश में आ रहा है। पिछले तीन साल में तीन कॉलेजाें में हुए करोड़ों रुपए से बने भवन बेकार हो गए हैं। एबीएम कॉलेज की छत का प्लास्टर झरने लगा है। इस कारण कॉलेज प्रबंधन द्वारा कॉलेज की कक्षाओं को प्रारंभ करने में देरी हो रही है। दूसरे कार्य की शिफ्टिंग का प्रस्ताव भी रोक दिया गया है। इस बाबत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुन्द्रिता चन्दा ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से लिखित शिकायत की है। अब विश्वविद्यालय से निर्देश मिलने के बाद ही शिफ्टिंग का काम होगा। एबीएम कॉलेज के नए भवन के निर्माण में तकरीबन चार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। वहीं वर्कर्स कॉलेज में 47 लाख रुपए की लागत से भवन मरम्मत कार्य में बरती गई अनियमितता की निष्पक्ष जांच के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने राजभवन को पत्र लिखा है। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि जिस भवन की मरम्मत होनी थी उसकी जगह एजेंसी ने दूसरे भवन की कम लागत में मरम्मत कर दी। यह एक घोटाला है, जिसकी जांच होनी चाहिए। बीस दिन पहले विश्वविद्यालय प्रबंधन ने जांच टीम बनाई थी। सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई थी। लेकिन अब तक जांच के लिए संबंधित कॉलेजों में कमेटी नहीं पहुंची है। गौरतलब है कि कोल्हान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ नीतीश कुमार ने भी एबीएम कॉलेज के नये भवन निर्माण में अनियमितता को लेकर राज्यपाल और कुलपति को पत्र लिखा था। उसके बाद इसके संवेदक द्वारा उनके खिलाफ प्राथमिकी तक दर्ज करवा दी थी।

बिल्डिंग बनने के बाद पड़ने लगी दरार

7 करोड़ की लागत से को-ऑपरेटिव में बना भवन वर्कर्स और एबीएम कॉलेज में बिल्डिंग की मरम्मत

वर्कर्स कॉलेज : 26 लाख खर्च करने के बाद दरार नहीं भरी

केयू के अंगीभूत कॉलेजों में भवन निर्माण व मरम्मत में गड़बड़ी का सिलसिला जारी है। एक बार फिर वर्कर्स कॉलेज के मुख्य भवन में मरम्मत कार्य में ठेकेदार की ओर से लापरवाही बरतने का मामला प्रकाश में आया है। विवि की टीम ने भी निरीक्षण के दौरान सही पाया। कॉलेज के मुख्य भवन में 26 लाख रुपए खर्च कर मरम्मत की गई थी। लेकिन 20 दिन के अंदर छत व पिलर में दरारें पड़ गई हैं। विवि के प्रॉक्टर डॉ. एके झा ने औचक निरीक्षण के वक्त कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कॉलेज के प्रिंसिपल को निर्देश देते हुए कहा कि वे विवि काे लिखित रूप से सूचित करें। जांच पूरी होने तक भुगतान भी नहीं करें।

को-ऑपरेटिव कॉलेज : दो साल में ही दरकने लगा भवन

जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में करोड़ों की लागत से बना पीजी विभाग का भवन दो साल में ही दरकने लगा है। विभाग के अलग-अलग हिस्सों की दीवारों में दरार पड़ गई है। फर्श पर लगा टाइल्स भी टूटने लगा है। झारखंड छात्र मोर्चा ने घटिया निर्माण के लिए संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। माेर्चा के मो. सरफराज ने कहा- जिस प्रकार से पीजी ब्लॉक के भवन में दरार पड़ी है, उससे स्पष्ट होता है घटिया सामान का प्रयोग कर पैसा बचाया गया। यह भवन केयू व उसके कालेजों में निर्माण कार्य में हो रही कमीशनखोरी व उसकी वजह से खटिया सामग्री के प्रयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है। को-ऑपरेटिव कॉलेज के जिस पीजी ब्लॉक के दीवार में दरार पड़ी है। उसके निर्माण पर करीब 7 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

20 दिन पहले बनी जांच कमेटी लेकिन जांच करने पहुंची टीम

20 दिन पहले जांच के लिए प्रो. वीसी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है, लेकिन अब तक जांच के लिए संबंधित कॉलेजों में कमेटी नहीं पहुंची है। जबकि घोषणा के मुताबिक एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन भी चुप है। ऐसे में इनकी कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है।

जांच में दोषी साबित होने के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ होगी कार्रवाई

 कॉलेजों में भवन निर्माण को लेकर शिकायत मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई होगी। करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाले भवन में अगर छह महीने के अंदर दरार पड़ जाती है तो यह गंभीर मामला है।  डॉ रंजीत कुमार सिंह, प्रोवीसी केयू

लागत

47 लाख रुपए

कब बना

6 माह पहले

लागत

7 करोड़ रुपए

कब बना

2 साल पहले

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