मां ने पढ़ने के लिए डांटा तो डीएवी पब्लिक स्कूल बिष्टुपुर के 7वीं के छात्र अमृत आनंद (13 साल) ने फांसी लगा ली। उसने रविवार रात खिड़की में ओढ़नी के सहारे फंदे से लटककर जान दी। मां पूनम उसी स्कूल की लाइब्रेरी अटेंडर हैं, जिसमें बेटा पढ़ता था। वे कदमा उलियान स्थित नटराज क्लासिक अपार्टमेंट में रहती हैं। दो साल पहले इंजीनियर पति मनोज सिंह की बीमारी से मौत हो गई थी। पूनम सिंह की चित्रा नाम की एक बेटी है। शेष पेज 05
डीएवी बिष्टुपुर में ही लाइब्रेरी अटेंडर हैं मां पूनम, बेटे ने खिड़की में ओढ़नी के फंदे से लटककर दी जान
पढ़ने के लिए डांटा, ताकि अच्छा आदमी बने : मां
दो साल पहले बीमारी से हो गई थी पिता की मौत
पूनम ने कहा, दो साल पहले इंजीनियर पति ने साथ छोड़ दिया था। तब सोचा था कि बच्चों के सहारे जिंदगी कट जाएगी। अब बेटा भी साथ छोड़ गया। अमृत जिद्दी था। रविवार रात मैंने उसे पढ़ने के लिए कहा तो वह भागने लगा। फिर अपने कमरे में चला गया। मैंने गुस्से में अमृत के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। शायद यही मेरी भूल थी। कुछ देर बाद कुंडी खोल दी लेकिन अमृत भी अंदर से दरवाजा बंद कर चुका था। रात में उसने खाना भी नहीं खाया। मैंने सोचा सुबह तक सब नॉर्मल हो जाएगा। सुबह मैं स्कूल चली गई। वह अक्सर लेट उठता था। काफी मुश्किलों से दोनों बच्चों को पढ़ा रही थी। सोचा था वह पिता की तरह एक अच्छा आदमी बनेगा। अमृत दो दिन पहले ही मामा के घर से लौटा था।
बच्चों की कमजोरियां पहचानें, प्रेशर न डालें
बच्चों में सहनशीलता कम होती है। वे कुछ बातें बर्दाश्त नहीं कर पाते। पैरेंट्स जो नहीं कर पाते, उन्हें बच्चों से होता देखना चाहते हैं। उनको इच्छानुसार चलाना चाहते हैं, जबकि उनमें कुछ और करने की लालसा होती है। ऐसे में उन्हें लगता है कि दबाव दिया जा रहा है। लोग तुरंत रिजल्ट चाहते हैं। इसलिए ऐसी घटनाओं के हम खुद जिम्मेदार हैं। संयुक्त परिवार का टूटना भी एक कारण है। पहले परिवार में किसी तरह की बात होने पर लोग घर के बड़े-छोटों से बात करते थे। अब वैसा नहीं है।
- निधि श्रीवास्तव, मनोवैज्ञानिक
पढ़ाई के दबाव में नौ दिन में तीन छात्रों ने की खुदकुशी | पेज 05