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पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के कारण बारूद की गंध फैली तो दलमा से निकल भागे हाथी

3 वर्ष पहले
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भाकपा माओवादी के पश्चिम बंगाल सचिव आकाश को पकड़ने के लिए पुलिस ने दलमा जंगल के कोंकादासा में ऑपरेशन चलाया। दोनों तरफ से गोलियां चलीं जिससे बारूद की गंध फैल गई। दलमा के कोयरा, कोंकादासा, रामगढ़ व खोखरो के साथ दलमा की चोटी के आसपास गजराज विचरण करना पसंद करते हैं। इसी इलाके में बारूद की गंध अधिक फैली। गजराज को बारूद की गंध नहीं भाती। इस वजह से गजराज दलमा से इधर-उधर चल दिए। कुछ चाकुलिया के जंगलों में गए हैं तो कुछ चांडिल की ओर।

दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी की प्रसिद्धि हाथियों के कारण है। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सेंदरा पर्व के पहले दलमा जंगल में हाथियों की गणना की थी। 66 हाथी जंगल के भीतर पाए गए थे। सेंदरा पर्व के दौरान हाथी दलमा जंगल के राजा की तरह इधर से उधर घूमते रहे। वन विभाग का मत है कि जंगली जानवरों का नहीं के बराबर शिकार होने का प्रमुख कारण गजराज थे। जंगल के भीतर गए सेंदरा वीर गजराज के कारण एक जगह टिक कर शिकार नहीं कर सके। दलमा जंगल झारखंड से पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। भाकपा माओवादी की जड़ इस जिले से उखड़ चुकी है। नक्सली आकाश कुछ लोगों के साथ छिपता फिर रहा है। छिपने के लिए दलमा से अच्छी जगह नहीं। पुलिस माओवादियों का पीछा कर रही थी। उसी दौरान सूचना मिली कि साथियों के साथ आकाश दलमा जंगल में है। पीछा करने पर कोंकादासा में मुठभेड़ हुई। दो दिन तक चले ऑपरेशन में बारूद की गंध फैल गई क्योंकि दलमा का वातावरण शुद्ध है। बारूद की गंध दूर तक फैली तो गजराज निकलने लग गए। सिर्फ कुछ गजराज बचे हैं।

गजराज की सूंघने की शक्ति अपेक्षाकृत अधिक

हाथी कोलाहल पसंद नहीं करते। उन्हें बारूद की गंध तनिक भी बर्दाश्त नहीं होती। वैसे भी गजराज की सूंघने की शक्ति अपेक्षाकृत अधिक होती है। पुलिस-माओवादी मुठभेड़ में स्वाभाविक तौर पर जंगल के भीतर बारूद की गंध फैली है। जानकारी आई है कि कुछ हाथी चाकुलिया तो कुछ चांडिल की ओर गए हैं। चंद्रमौली सिन्हा, उप निदेशक, गज परियोजना, दलमा

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