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जिन स्कूलों के विलय को लेकर विवाद उसकी जांच करा कर समाधान निकालें

3 वर्ष पहले
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एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर

झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिला शिक्षा पदाधिकारियों व जिला शिक्षा अधीक्षकों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दैारान स्कूल विलय की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया।

साथ ही जिन स्कूलों के विलय को लेकर विवाद है। उसकी जांच कर संबंधित कारणों का पता लगाकर उसका समाधान कर इस समस्या को दूर करने का निर्देश दिया। साथ ही विलय के बाद विलय के बाद गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों के रेशनेलाइजेशन की प्रक्रिया को यथाशीघ्र पूरा करने का निर्देश शिक्षा सचिव ने सभी डीएसई को दिया। इसके अलावा स्कूलों में पेयजल व सप्लाई वाटर को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान उन्होंने कहा कि तीन साल से एक ही प्रखंड में जमे प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों का बतादला किया जाएगा। इसमें कहा गया कि जिस विद्यालय में भी 500 या उससे अधिक छात्र हैं वहां रनिंग वाटर की व्यवस्था कराई जाए। इस दौरान पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा पदाधिकारी आरकेपी सिंह तथा जिला शिक्षा अधीक्षक बांके बिहारी सिंह ने बैठक में हिस्सा लिया।

यह निर्देश भी दिया

सभी कस्तूरबा विद्यालयों में स्वास्थ विभाग के सहयोग से नि:शुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध कराया जाए।

नई किताबों के छपायी में देर होगी। ऐसे में पुरानी से बच्चों को पढ़ाया जाए।

मॉडल विद्यालयों को आवासीय विद्यालय में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो।

जिले में कस्तूरबा विद्यालयों को चिन्हित कर आर्ट्स, काॅमर्स और साइंस की पढ़ाई सुनिश्चित की जाए।

बर्शर ने को-ऑपरेटिव कॉलेज में बड़ी वित्तीय अनियमितता की बात कही

एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर

को-ऑपरेटिव कॉलेज के बर्शर (आय) डॉ. एमएन तिवारी ने कॉलेज में बड़ी वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई है। उन्होंने इस संबंध में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एनआर चक्रवर्ती को पत्र लिखकर अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक वित्तीय मामलों का एक्सटर्नल ऑडिट कराने की मांग की है। हालांकि कॉलेज के प्रिंसिपल ने डॉ. एनआर चक्रवर्ती ने अभी तक किसी भी प्रकार का पत्र मिलने से इनकार किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई पत्र मिलता है तो वे उसकी गंभीरता को देखते हुए निर्णय लेंगे। बर्शर द्वारा लिखे गए की माने तो अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक महाविद्यालय के अकाउंट्स के जरिए करीब 12 करोड़ रुपये खर्च किया गया। इस राशि को कॉलेज के नए भवन, पुराने भवन के मरम्मति व प्रयोगशाला को अत्याधुनिक बनाने पर खर्च किया गया है। इसके साथ ही इस दौरान एक बड़ी राशि किताब खरीदारी पर खर्च हुआ है। जिसे लेकर पूर्व प्रिंसिपल पर कार्रवाई तक हो चुकी है। को-ऑपरेटिव कॉलेज के बर्शर डॉ. एमएन तिवारी की मानें तो कॉलेज में कमीशन का सबसे बड़ा खेल एक बैंक से दूसरे बैंक में राशि ट्रांसफर करने के नाम पर हुअा है। यहीं नहीं कुछ लोगों ने इस राशि से अपने घर तक का निर्माण कराया है।

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