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शराब पीकर ढो रहा था बच्चों को, पुलिस ने पकड़ा तो बोला-रोज ऐसे ही गाड़ी चलाता हूं

3 वर्ष पहले
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ओवरलोड स्कूली वैन-ऑटो के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस ने मंगलवार को भी अभियान चलाया। 50 से अधिक स्कूली वाहन पकड़े गए। जुर्माना वसूलकर कुछ वाहनों को छोड़ दिया गया, कई वाहन विभिन्न थाने में खड़ा करा दिए गए। जांच अभियान से बच्चों को परेशानी न हो, इसलिए पुलिस ने उन्हें घर तक पहुंचाया। 50% स्कूली वाहन नहीं चले, लिहाजा बच्चों को लाने के लिए अभिभावकों को स्कूल जाना पड़ा। बच्चों को ऑटो से ले जा रहे फुलवारी कुमार नाम का चालक साकची बागे जमशेद के पास पकड़ा गया। वह शराब के नशे में धुत था। पुलिस ने ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराई मीटर उच्चतम रिकॉर्ड पर जा पहुंचा। पूछताछ में बोला- रोज ऐसे ही बच्चों को घर तक पहुंचाता हूं, आजतक कुछ नहीं हुआ। पुलिस बच्चों को दूसरी गाड़ी से घर भिजवाई और उसे साकची थाने ले गई। उसके लाइसेंस रद्द कर दिए और 7 हजार रुपए जुर्माना ठोका है। इसमें नशा कर गाड़ी चलाने के जुर्म में 2000 रुपए, ओवरलोडिंग के लिए 2000 रुपए और कागजात नहीं रखने के लिए 3000 रुपए शामिल है।

अब कोई अिभजीत की तरह न बिछुड़े

बगैर कागजात और ओवरलोड चल रहे 50 से अधिक ऑटो-वैन पकड़ाए, पुलिस ने बच्चों को घर पहुंचाया

मानगो में उलझे वैन संचालक

मानगो चौक के पास ट्रैफिक पुलिस ने एक वैन चालक को पकड़ा। उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस व कागजात नहीं थे। पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी कि वैन मालिक मानगो दाईगुट्टू निवासी सुबोध तिवारी पहुंचे और उलझ गए। कहा-पैर में जख्म है। वैन की कमाई से परिवार चलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि वैन को नहीं छोड़ा गया तो सुवर्णरेखा नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर लेंगे। पुलिस ने उन्हें थाने ले गई। बाद में छोड़ दिया गया।

शराबी चालक... इनके हाथों में हमारे बच्चे

ऑटो चालक बोले : शहर में बंद करें ऑटो की बिक्री

ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन हम कहां जाएं। परिवार चलाने के लिए ऑटो चला रहे हैं। अगर परमिट देना बंद है तो शहर में ऑटो की बिक्री भी नहीं होनी चाहिए। -सविंदर सिंह, नामदा बस्ती

पुिलस का एक्शन

लाइसेंस रद्द, सात हजार रुपए जुर्माना

ऑटो चालक गरीब परिवार से होते हैं। हमारे भी बच्चे हैं। जितनी फाइन वसूली हो रही है, यह गलत है। कुछ बीच का समाधान निकालना चाहिए। एक मौका दिया जाए। -नीतू कुमारी, आदित्यपुर, ऑटो चालक की प|ी

अब नियमित जांच हो

बताकर जांच-कार्रवाई से कोई फायदा नहीं होगा। प्रशासन इस जांच को नियमित तौर पर चलाए और किसी भी इलाके में कभी भी औचक जांच करे तभी चालकों में डर बना रहेगा। कविता कानन, बागबेड़ा

अभियान महज फाइन वसूली तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अक्सर अभियान के तहत कार्रवाई होती है, बाद में स्थिति जस की तस हो जाती है। प्रशासन व्यवस्था में सुधार करे। -रमेश शर्मा, परसुडीह

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