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संदीप, पूनम और स्वर्णलता ने एवरेस्ट फतह के लिए की थी माउंट एकांकुआ में तैयारी

3 वर्ष पहले
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स्पोर्ट्स रिपोर्टर जमशेदपुर

टाटा स्टील एडवेंटर फाउंडेशन के इंस्ट्रक्टर संदीप टोलिया, ओडिशा की स्वर्णलता और उत्तराखंड की पूनम राणा ने सोमवार को एवरेस्ट की सफललतापूर्वक चढ़ाई कर ली है। इससे पहले टीएसएएफ में कार्य करते हुए राजेंद्र सिंह पाल ने एवरेस्ट अभियान को पूरा किया था। अभियान पर जाने से पहले दुर्गम पर्वत माउंट एकांकागुआ में दी गई ट्रेनिंग इन पर्वतारोहियों को पिछले एक वर्ष से टीएसएएफ में प्रशिक्षण दिया जा रहा था।

इस वर्ष फरवरी महीने में अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहियों के साथ प्रशिक्षण के उद्देश्य से उन्हें माउंट एकांकागुआ भेजा गया था, जो साउथ अमेरिका की सबसे उच्च और दुनिया की 7 प्रमुख चोटियों में एक है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने माउंट एवरेस्ट अभियान की तरह ही ऊंचाई, अत्यंत विषम और सख्त परिस्थितियों का सामना किया था। 25 फरवरी 2018 को इस तिकड़ी ने टीएसएएफ के तहत अन्य प्रशिक्षण के लिए जमशेदपुर से प्रस्थान किया था। इसमें बेहद ठंड की परिस्थितयों, भारी सामान लेकर ऊपर चढऩे व उतरने तथा तंबू में सोने का एक महीने लंबा प्रशिक्षण दिया गया।

दिल्ली से 26 मार्च को निकले थे तीनों पर्वतारोही

संदीप, पूनम और स्वर्णलता टीएसएएफ की चीफ बचेंद्री पाल। (फाइल फोटो)

तीनों पर्वतारोही 26 मार्च को दिल्ली पहुंचें, जहां से काठमांडू के लिए रवाना हुए। 27 मार्च से टीम झिरी रूट के जरिए एवरेस्ट कैंप पहुंचे। 23, 625 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित कैंप कर तीनों को पहुंचना था। 19 अप्रैल को तीनों एवरेस्टर ने लोबुचे पर्वत पर पहुंचे तीनों पर्वतारोहियों ने 25 फरवरी से उत्तरकाशी में ट्रेनिंग में हिस्सा लिया। लगभग दस तीनों पर्वतारोही काठमांडू होते हुए लोबुचे अभियान पर निकल गए। तीनों ने 19 अप्रैल को लोबुचे फतह कर एवरेस्ट बेस कैंप के लिए रवाना हुए। अंतिम समिट 15 मई से शुरू हुई। तीनों पर्वतारोही 31 मई को जमशेदपुर पहुंचेंगे ।

1. स्वर्णलता दलाईः 20 वर्षीय ओड़िशा की आदिवासी लड़की ने 2017 में अपनी पर्वतारोहण यात्रा के दौरान कौशल और उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रसिद्धि पायी। उन्होंने बीजू पटनायक हिमालय अभियान के तहत रूडुगेइरा अभियान में हिस्सा लिया है। इसके अलावा, उन्होंने हिमालय की ऊंची चोटियों की सफल चढाई की है। एवरेस्ट अभियान के लिए टाटा स्टील द्वारा प्रायोजित वह ओडिशा की एकमात्र लड़की है।

2. पूनम राणाः 21 वर्षीय उत्तरकाशी, उत्तराखंड से है। उन्होंने अप्रैल 2017 में एवरेस्ट बेस कैंप तक ट्रेकिंग की। उनका जीवन त्रासदियों से भरा रहा है। युवावस्था में ही उनका पिता का देहांत हो गया था। बाद में उसकी मां और दो भाई भी नहीं रहे। फिलहाल पूनम टीएसएएफ के साथ शिविर प्रभारी के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने बेसिक और एडवांस पर्वतारोहण पाठ्यक्रम किया है।

3. संदीप टोलियाः 10 साल से अधिक समय से टीएसएएफ के साथ प्रशिक्षक के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने बेसिक व एडवांस पर्वतारोहण पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण की विधि, नेशनल आउटडोर लीडरशिप कोर्स (यूएसए) में आउटडोर एजुकेटर सेमेस्टर, एनओएलएस और रानीखेत में ट्रिप लीडरशिप कोर्स किया है। वे माउंट भागीरथी-2, माउंट रुडुगेइरा, माउंट कनामो, स्टोक कांगड़ी और काराकोरम दर्रे शामिल हैं।

 पर्वतारोहियों की यह शानदार उपलब्धि है, जिन्होंने अद्म्य साहस, उत्साह और जब्जे के साथ यह सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि पर गर्व हो रहा है कि हमने उनके इस सपने को साकार करने में सहयोग दिया। इस प्रयास से टीएसएएफ एडवेंचर स्पोर्ट्स को आगे बढ़ाने का काम जारी रखेगा।  सुनील भास्करन, वीपी, सीएस, टाटा स्टील

 एवरेस्ट अभियान पर गए शेरपाओं ने पहले ही कहा था, मैडम, इनकी तैयारियां जबरदस्त है। लेकिन मैने उन्हें कहा कि अतिविश्वास में रहे, क्योंकि पर्वतों के समक्ष हर कोई छोटा है। तीनों ने शानदार कामयाबी हासिल की है। पूनम, स्वर्णलता और संदीप टोलिया को ढेरों बधाई।  बचेंद्रीपाल, चीफ, टीएसएएफ

 मैं बहुत खुश हूं। हर एक एवरेस्टर का ड्रीम होता है कि वह माउंट एवरेस्ट की चोटी को चूम ले। संदीप का सपना भी यही था। बहुत जल्दी ड्रीम पूरा हुआ। पहले मैं डरी, लेकिन मुझे लगा कि दस वर्षों से भी अधिक समय से एडवेंचर फील्ड में हैं। संदीप एवरेस्ट की चोटी पर जरूर पहुंचेगा।  पूनम टोलिया, प|ी संदीप टोलिया

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