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मनुष्य जिस चीज को सबसे अधिक चाहता है वही उसके कष्ट का कारण बनता है : आचार्य

3 वर्ष पहले
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केंद्रीय प्रशिक्षक आचार्य विमलानंद अवधूत ने कहा कि गति ही जीवन है और नश्वरता इस विश्व प्रकृति का नियम है। चलने की शक्ति का मूल उत्स हैं परम पुरुष। साधक के जीवन में इष्ट और आदर्श दोनों का महत्व है। मनुष्य जो होना चाहता है वही उसका आदर्श है। मनुष्य जिस चीज को सबसे अधिक चाहता है वही उसके कष्ट का कारण बनता है वे आनंदमार्ग प्रचारक संघ के तत्वावधान में गदड़ा आश्रम में प्रथम संभागीय सेमिनार के दूसरे दिन शनिवार को लोगों को संबोधित कर रहे थे। साधकों ने गुरु सकाश एवं पांचजन्य में अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र “बाबा नाम केवलम्” का गायन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

मूल्य ही श्रेष्ठ जीवन की आधारशिला : जया बहन
केएमपीएम वोकेशनल काॅलेज में शनिवार को प्रजापिता ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सौजन्य से मूल्य शिक्षा पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें जया बहन ने बताया कि यह मान्यता तेजी से बढ़ती जा रही है कि ईमानदारी, आज्ञाकारिता, धैर्य, नम्रता आदि मूल्यों को वास्तविक जीवन से जोड़ पाना असंभव है। हम अपने अंतर्मन में झांक कर देखें तो इन जीवन मूल्यों में ही हम सहज अनुभव करते हैं और इसके अभाव में आज हमारा समाज दिशाहीन होता जा रहा है। इसलिए जीवन के प्रारंभिक काल से ही हम यह तकनीक सीख लें कि किस प्रकार इन मूल्यों से व्यक्तित्व को सशक्त बना सकते हैं।

सेमिनार में शामिल श्रद्धालु।

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