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एम्स का एंट्रेंस टेस्ट 26-27 को, एडमिट कार्ड हुए जारी

3 वर्ष पहले
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जमशेदपुर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) ने एमबीबीएस के एडमिट कार्ड गुरुवार को ऑफीशियल वेबसाइट www.aiimsexams.org पर जारी कर दिए। एडमिट कार्ड के लिए वेबसाइट पर लॉग इन करें। अपनी आईडी और पासवर्ड डालें। लॉगइन बटन पर क्लिक करें। एडमिट कार्ड आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देगा। चेक करके इसे डाउनलोड कर लें और प्रिंट आउट ले लें। एम्स एमबीबीएस-2018 का एंट्रेंस एग्जाम 26 और 27 मई को दो शिफ्ट में होगा। पहली शिफ्ट सुबह 9 बजे से 12.30 बजे तक होगी और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 6.30 बजे होगी। परीक्षा कंप्यूटर पर आधारित होगी। एम्स की परीक्षा देशभर में 171 शहरों में करवाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि एम्स हर साल 800 से ज्यादा एमबीबीएस सीटों के लिए परीक्षा करवाता है।

आईटी मंत्रालय ने शुरू की समर इंटर्नशिप ट्रेनिंग : सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने इंजीनियरिंग छात्रों के लिए इंटर्नशिप योजना शुरू की है। मंत्रालय साल में कुल 70 इंटर्नशिप देगा, जिनकी अवधि दो से तीन महीने होगी। इस दौरान छात्रों को दस हजार रुपए प्रतिमाह की राशि भी प्रदान की जाएगी। इसके लिए छात्र मंत्रालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने योजना का शुभारंभ किया था।

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2018-19 को महिला सशक्तीकरण वर्ष घोषित किया

30 वर्ष पूर्व बने नियम का सख्ती से होगा पालन, बिना टिकट महिला यात्री को ट्रेन से नहीं उतार पाएंगे टीटीई

डीबी स्टार जमशेदपुर

बिना टिकट अकेले सफर कर रही महिला रेल यात्री को टीटीई अब ट्रेन से नहीं उतार सकेंगे। इसको लेकर रेलवे की ओर से गाइडलाइन भी जारी किया गया है। लगभग तीन दशक पुराने इस कानून को सख्ती से लागू करने को लेकर रेलवे बाेर्ड स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इस कानून के बारे में अधिकांश लोगों की बातें तो दूर रेल कर्मियों को भी जानकारी नहीं है।

चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम भास्कर ने बताया कि महिला यात्रियों को सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बोर्ड की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसी सूचनाएं मिलती हैं कि किसी स्टेशन पर या ट्रेन में अकेले सफर कर रही महिला यात्री के साथ छेड़खानी व अन्य घटनाएं घट रही हैं। वहीं अकेले सफर कर रही महिला यात्री को किसी भी स्टेशन पर उतारने से अनहोनी की आशंका भी बनी रहती है।

इसलिए तीन दशक पुराने कानून को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है। रेलवे की ओर से वर्ष 2018-19 को महिला सशक्तिकरण वर्ष घोषित किया गया है। इसमें महिला यात्रियों के लिए सुरक्षा, संरक्षा व सुविधा को बेहतर बनाया जाना है। इसमें अकेली महिला यात्री की सुरक्षा पुख्ता करने समेत कई उपाय भी किए जाने हैं।

1989 में बनाया गया था कानून

सीनियर डीसीएम ने बताया कि वर्ष 1989 में कानून बना था। इसके तहत अकेले सफर कर रही महिला यात्री को टिकट नहीं होने पर किसी भी स्टेशन पर नहीं उतारा जा सकता है। टीटीई को जिला मुख्यालय के स्टेशन पर कंट्रोल रूम को सूचित करना होता है और वहां से उसे दूसरी ट्रेन में टिकट के साथ बैठाने की जिम्मेवारी जीआरपी के महिला कांस्टेबल की होती है। वहीं आरक्षित कोच में प्रतीक्षा सूची में नाम होने पर भी उसे कोच से नहीं निकाला जा सकता है।

तत्काल टिकट की बुकिंग में विशेष सतर्कता बरतेगा रेलवे

इधर, दक्षिण-पूर्व रेलवे की विजिलेंस टीम ने रेलवे बोर्ड को अनुशंसा की है कि दूसरी जगहों से यात्रा करने वाले यात्रियों से टिकट लेने के दौरान यह प्रमाण लिया जाए कि वे 24 घंटे के अंदर संबंधित स्टेशन पर कैसे पहुंचेंगे और समय पर ट्रेन पकड़ लेंगे। संदेहास्पद यात्रियों को टिकट न दें। यह अनुशंसा तत्काल टिकट में गड़बड़ी को लेकर देशभर में चलाई गई ड्राइव में 6600 फर्जी टिकट पकड़े जाने के बाद की गई है। रांची स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर भी रेल विजिलेंस टीम की छापेमारी के दौरान यह बात सामने आई कि दिल्ली और मुंबई की राजधानी ट्रेन के लिए रांची से तत्काल टिकट लिया गया था। जब विजिलेंस ने संबंधित यात्री से पूछताछ की कोशिश की तो वह फरार हो गया था।

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