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ममेरा भाई ही हत्यारा, दुष्कर्म बाद खून निकलने पर पकड़ाने के डर से चाकू से काट दी थी गर्दन

3 वर्ष पहले
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बर्मामाइंस दास बस्ती में चार वर्षीय मासूम नैना दास से दुष्कर्म और हत्या के मामले का खुलासा हो गया। उसका 20 वर्षीय ममेरा भाई विक्रम दास ही हत्यारा और दुष्कर्मी निकला। यह वही आरोपी है, जिसे हत्या के शक में पुलिस ने पूछताछ के लिए पकड़ा और उसे बचाने के लिए बस्तीवालों ने थाने का घेराव कर दिया था। आरोपी ने गुरुवार रात ही पुलिस के सामने स्वीकार कर लिया था कि दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या कर दी थी।

शुक्रवार को एसएसपी अनूप बिरथरे ने मीडिया को बताया, आरोपी ने माना है कि उसने फुफेरी बहन के साथ दुष्कर्म किया। इससे पहले वह दो बार बच्ची के साथ दुष्कर्म कर चुका था। वहीं, तीसरी बार खून निकलने पर पकड़े जाने के डर से उसने चाकू से बच्ची की गर्दन काटकर हत्या कर दी।

मृत बच्ची नैना

पुलिस को पहले दिन से आरोपी पर शक था
एसएसपी अनूप बिरथरे ने कहा हत्या के बाद पुलिस को पहले दिन से ही विक्रम पर शक था, लेकिन परिजनों के सपोर्ट के चलते उसे पकड़ने में देरी हुई। हत्या में प्रयुक्त चाकू, मृतका के कपड़े, गले की ताबीज और चांदी का कड़ा बरामद किया गया है। आरोपी विक्रम ने पहले तो हत्याकांड में संलिप्तता से इंकार किया। फिर पुलिस ने सख्ती दिखाई तो उसने अपराध स्वीकारा। पूछताछ के बाद विक्रम को जेल भेजा गया। विक्रम की शादी को तीन-चार साल हो गए, लेकिन उसकी संतान नहीं हुई।

फिर रिश्ते को किया कलंकित: अनजान मां शाम तक बेटी के हत्यारे को बचाने की गुहार लगाती रही, पति ने सच्चाई बताई तो कहा- कड़ी सजा मिले
आरोपी विक्रम दास

जिसे छुड़ाने के लिए बस्तीवािसयों ने थाने में हंगामा किया था, उसके आरोपी होने का पता चलने पर आक्रोश
बर्मामांइस में मासूम नैना की हत्या मामले का पुलिस ने खुलासा तो कर दिया, लेकिन इस घटना ने न केवल रिश्ते को तार-तार किया है बल्कि एक माता-पिता के विश्वास को भी तोड़ दिया। चार वर्षीय नैना का हत्यारा उसका ममेरा भाई विक्रम दास ही निकला। इस मामले में पुलिस ने विक्रम को दो बार पहले भी हिरासत में लिया था, लेकिन बच्ची की मां उसे बचा लाई थी। पुलिस ने विक्रम को तीसरी बार हिरासत में लिया। कड़ाई से पूछताछ में उसने अपना अपराध कबूला। देर शाम नैना के पिता डबलू दास ने घर पहुंचकर सारी बात बताई तो लक्ष्मी की हालत खराब हो गई। वह पूछ रही थी- विक्रमवा ऐसा काहे किया, कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

हिरासत में लेकर पुलिस ने छोड़ दिया था
एसएसपी अनूप बिरथरे ने बताया पुलिस को शुरू से विक्रम पर संदेह था। उसे पहले दिन ही हिरासत में लिया गया, लेकिन उसके परिजन व बस्तीवासियों को यकीन नहीं था कि वह ऐसा कुकृत्य कर सकता है। विक्रम दास ने भी हत्याकांड में संलिप्तता से इनकार किया था। लोगों ने थाने पर हंगामा किया और इसलिए उसे छोड़ दिया गया था। अब उसने दोष कबूल कर लिया है। बस्तीवासी उसे निर्दोष समझते रहे। वह भी सबकी आंखों में धूल झाेंकता रहा, सच्चाई सामने आई तो लोग हैरान हैं।

लक्ष्मी ने डीएसपी से कहकर विक्रम को छुड़वाया था

हत्या के दूसरे दिन ही पुलिस ने विक्रम दास को पूछताछ के लिए उठाया था। इसी बीच बच्ची की मां लक्ष्मी की साड़ी में पेट्रोल डालकर बस्ती में आग लगाने वाली घटना को नाटकीय ढंग से अंजाम दिया गया। उस दौरान लक्ष्मी देवी के दबाव देने पर डीएसपी ने विक्रम को छोड़ने का आदेश दिया था।

जानकारी मिलते ही बस्ती में तनाव का माहौल

डबलू दास ने जब घर पहुंचकर घटना की सारी जानकारी दी तो बस्ती में तनाव का माहौल बन गया, क्योंकि इन लोगों द्वारा अब तक बगल की बस्ती के युवकों पर आरोप लगाया जा रहा था। पुलिस ने कई बार युवकों को पूछताछ के लिए उठाया भी था।

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