आज पर्वों के सात रंग : चार समाज मनाएंगे नए साल का जश्न; बिहारी सतुआन का आनंद लेंगे
जमशेदपुर | शहर में गंगा-जमुनी तहजीब का मिलन ही नहीं, संस्कृतियों का संगम भी देखने को मिलता है। शनिवार को सात समाजों की संस्कृतियाें का संगम होगा। कई समाज के नव वर्ष की शुरुआत होगी तो कई समाज नया कार्य शुरू करेंगे। भोजपुरी क्षेत्र में ‘सतुआन’, मिथिलांचल में ‘जुड़ी शीतल’, ओड़िशा में ‘पाना संक्रांति’, पंजाब में ‘बैशाखी’, केरल में ‘विशु’, तमिलनाडु में ‘पुदुवर्षम’ मनाया जाता है। शहरवासी 100 साल से सबकी संस्कृति साझा करते आए हैं।
1. पंजाबी समाज
1699 में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंहजी ने इस दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। बैशाख रबी की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक भी है।
2. नेपाली समाज
2075 वर्ष पहले एक गते यानी, नए साल की शुरुआत हुई थी। नेपाली समाज बैशाख में अंग्रेजों से जीत की खुशी भी मनाता है। इस दिन नेपाल के राजा ने अपने समाज के लोगों को आजादी दिलाई थी।
3. बंगाली समाज
पोइला बैशाख का इतिहास भी पुराना है। हालांकि, बंगला देश में 1961 में पहली बार मनाया गया था। बंगाली समाज शादी-ब्याह के लिए बैशाख महीने को शुभ मानते हैं। समाज में नया बही-खाता शुरू किया जाता है।
4. बिहारी समाज
1415 से सतुआन मनाया जा रहा है। गर्मी के दिनों में लू से बचने के लिए आम के टिकोरे की चटनी सत्तू के साथ सेवन करने से धूप का असर कम होता है। लोग आम का पन्ना और सत्तू पीकर गर्मी से होने वाले दुष्प्रभाव दूर करते हैं।
5. मिथिला समाज
1415 से मिथिलांचल में मेष संक्रांति (बैसाख) को नववर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। बंगाल के सेन वंश के शासनकाल में यह शुरू हुआ। इस दिन को ‘जुड़ी शीतल’ मनाया जाता है और कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं।
6. तमिल समाज
तमिलनाडु में ‘पुदुवर्षम’ में मलयालम महीने ‘मेदम’ की पहली तिथि को मनाया जाता है। केरल में विशु उत्सव के दिन धान की बुआई का काम शुरू होता है। इसे ‘मलयाली न्यू ईयर विशु’ के नाम से पुकारा जाता है।
7. उड़िया समाज
समाज में पाणा संक्रांति 2075 साल से मनाया जा रहा है। पाणा संक्रांति (महा बिसाबा संक्रांति) को उड़िया समाज सबसे गर्म दिन मानता है। गर्मी से राहत के लिए शरबत, फल का जूस, पानी का वितरण किया जाता है।