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50 लाख रु. घूस लेने पर आयकर आयुक्त डॉ. श्वेताभ सुमन को सीबीआई ने दिल्ली से किया गिरफ्तार

3 वर्ष पहले
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सीबीआई ने शुक्रवार को 50 लाख की रिश्वत लेने के मामले में गुवाहाटी के आयकर आयुक्त (आॅडिट) डाॅ. श्वेताभ सुमन को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि टैक्स एसेसमेंट में गलत आदेश जारी कर व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने रिश्वत ली। डाॅ. सुमन लंबे समय तक जमशेदपुर में आयकर विभाग में रहे हैं। सीबीआई ने बुधवार को उनके खिलाफ केस दर्ज किया था। 40 लाख के साथ एक बिचौलिया भी पकड़ा गया है। देश में कहीं भी पदस्थापना के बावजूद उनका जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित नाॅर्दर्न टाउन बी रोड (ईस्ट) में टाटा स्टील का बंगला नंबर 16 है, जहां वे परिवार समेत रहते थे। सीबीआई ने नाॅर्दन टाउन स्थित आवास पर छापेमारी की। तब वहां कोई नहीं था। आवास को सील कर दिया गया है। बंगले की सुरक्षा बिष्टुपुर थानेदार श्रीनिवास को सौंपी गई है। आयकर के कुछ अन्य अधिकारियों व गुवाहाटी के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स को भी हिरासत में लिया गया है। आयकर अधिकारी प्रताप दास भी शामिल हैं। सीए रमेश गोयनका को भी पकड़ा गया है। सीबीआई ने जमशेदपुर, गुवाहाटी, जोरहाट, नौगांव, शिलांग, नोएडा और दिल्ली के अलावा कुछ और जगहों पर छापामारी की है। देर रात तक छापेमारी जारी थी।

डॉ. श्वेताभ सुमन।

जमशेदपुर, गुवाहाटी, जोरहाट, नौगांव, शिलांग, नोएडा और दिल्ली में छापा मारा, नाॅर्दर्न टाउन का बंगला सील, 40 लाख के साथ बिचौलिया भी पकड़ाया
जमशेदपुर के डाॅ. श्वेताभ गुवाहाटी में आयकर आयुक्त (आॅडिट) हैं
आय से अधिक संपत्ति के मामले में पहले भी हुई थी कार्रवाई
10 साल पहले भी सीबीआई ने डाॅ. श्वेताभ पर कार्रवाई की थी। वो तब सर्किट हाउस में रहते थे। कार्रवाई के बाद उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें निलंबन मुक्त कर दिया गया था। डाॅ. सुमन 1994 से जमशेदपुर से जुड़े हुए हैं। वे मूलत: बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले हैं।

डॉ. श्वेताभ का नाॅर्दर्न टाउन का बंगला सील

यह है मामला : सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक टैक्स चोरी और अन्य गड़बड़ियों की जांच के क्रम में डॉ. श्वेताभ पर ध्यान गया था। इस दौरान 50 लाख रुपए की रिश्वत लेने के मामले की जानकारी मिली। 2017-18 के दौरान डॉ. श्वेताभ सुमन गुवाहाटी में पदस्थापित थे। वे जोरहाट के अतिरिक्त प्रभार में थे। वहां के आयकर अधिकारी प्रताप दास की मिलीभगत से उन्होंने एक स्थानीय व्यापारी सुरेश अग्रवाल को नाजायज लाभ पहुंचाया था। रमेश गोयनका और अमित गोयनका ने भी गड़बड़ी में मदद की थी। सीबीआई को गुप्त सूचना मिली थी कि सुरेश अग्रवाल की फर्जी कंपनी मेसर्स विन पावर इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड का गुवाहाटी और जोरहाट में फर्जी कार्यालय है। कंपनी के पास दिल्ली में भी कार्यालय है। डॉ. श्वेताभ ने कंपनी के निदेशक सुरेश अग्रवाल को उनके मन मुताबिक आदेश देकर फायदा पहुंचाया।

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