आज वन विभाग के अफसर दलमा राजा का मनुहार करने गदड़ा उनके आवास पर जाएंगेे
शनिवार को वन विभाग के आला अफसर सेंदरा पर्व में जंगली जानवरों का शिकार नहीं करने के लिए दलमा राजा को समझाने के लिए उनके गदड़ा आवास पर जाएंगे। सेंदरा पर्व आदिवासियों की पुरातन परंपरा है। वन विभाग के लोग जानते हैं कि इससे आदिवासी समुदाय की भावना जुड़ी हुई है। वन विभाग ने चेक नाका बनाने की रणनीति तैयार कर ली है। जागरुकता की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत वन विभाग के अफसर गदड़ा में अपनी बात रखने जाएंगे। दलमा राजा ने वार्ता के लिए माझी परगना महाल के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया है।
टुपूडांग में शनिवार को चड़क पूजा है। आदिवासी समुदाय इकट्ठा होगा। दलमा राजा राकेश हेंब्रम 23 अप्रैल को सेंदरा पर्व मनाने के लिए दलमा आने का आदिवासी समुदाय को आमंत्रण देंगे। उन्होंने कहा कि ओडिशा, असम और पश्चिम बंगाल से भी सेंदरा पर्व में आदिवासी आएंगे, जिनके हाथ में तीर-धनुष होगा, वही सेंदरा वीर हैं। सिर्फ तीर-धनुष के सहारे शिकार करना होगा, जाल या फांस के सहारे नहीं। दलमा जंगल बेहद घना है, बारिश से सब जगह झाड़ी उग आई है, पेड़ों की भरमार है, जगह-जगह बड़ी चट्टान है। वहां तीर-धनुष के सहारे शिकार करना नामुमकिन जैसा है। जानवरों के लिए कहीं भी छिपना और भागना आसान है, सेंदरा वीरों के लिए बहुत मुश्किल। दलमा बुरू सेंदरा समिति के प्रमुख राकेश हेंब्रम ने कहा कि परंपरा के तहत शिकार करने के बाद उसकी गर्दन उन्हें मिलनी चाहिए।
दलमा राजा
बारिश के कारण दलमा में जानवर देखने जरूर मिलेंगे
दलमा राजा ने कहा कि सेंदरा पर्व के ठीक पहले भरपूर बारिश हो चुकी है। दलमा जंगल के सारे जलाशय पानी से भर चुके हैं। सेंदरा पर्व के दौरान भले सेंदरा वीर शिकार नहीं कर सकें, लेकिन उन्हें जानवरों को देखने का अवसर जरूर मिलेगा। जंगल में जानवरों की संख्या बढ़ गई है।