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यूनिसेफ का निष्कर्ष : छात्रावास में ठूंस-ठूंस कर रखी जाती हैं लड़कियां

3 वर्ष पहले
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गर्मी में पीने लायक पानी की भी व्यवस्था नहीं

एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर

कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में छात्राओं की संख्या तो बढ़ती जा रही है, लेकिन उस अनुपात में न तो आधारभूत संरचना और न ही आवश्यक मूलभूत सुविधाएं हैं। यहां तक की छात्राओं के लिए छात्रावास में कमरे कम पड़ रहे हैं। छात्रावास के एक कमरे में 10 से 12 लड़कियों के रहने की जगह है, लेकिन वहां 20 से 30 छात्राओं को रहना पड़ रहा है। यह हाल है मुसाबनी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का।

इसका खुलासा झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद और यूनिसेफ की ओर से कराए गए विद्यालयों के सर्वे से हुआ है। इसमें यह बात भी सामने आई कि कमरे में जगह कम पड़ने से छात्राएं ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं। अतिरिक्त गतिविधियों के लिए जगह नहीं उपलब्ध हो पा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस विद्यालय के पास अपना भवन तक नहीं है और यह दूसरे विद्यालय के भवन में चल रहा है। इस विद्यालय के भवन का निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन ठेकेदार आधा निर्माण कार्य छोड़ कर फरार हो गया है।

छात्रावास में जगह कम है, लेकिन सीटें बढ़ाने की योजना
सर्वे के दौरान स्कूलों से एक खास फॉर्मेट में संसाधनों और जरूरतों की जानकारी मांगी गई थी। मुसाबनी के कस्तूरबा विद्यालय ने बताया कि उसे छात्राओं के लिए शयन कक्ष की सख्त जरूरत है। एक तो अभी ही हर कमरे में क्षमता से काफी अधिक छात्राओं को रखना पड़ रहा है, ऊपर से स्कूल में 50 सीटें और बढ़ाने की योजना है। स्कूलों ने सर्वे में शौचालय, शौचालय की टंकी, सैनेटरी वेंडिंग मशीन, एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर प्यूरीफायर की व्यवस्था करने की भी जरूरत बताई है।

कस्तूरबा विद्यालय, डुमरिया
स्कूल प्रबंधन ने पेयजल की व्यवस्था के लिए डीप बोरिंग और सेनिटेशन के लिए बड़ा सेप्टिक टैंक बनाने की जरूरत बताई है। इसके अलावा रसोई घर में रैक, छात्रावास में कमरों की संख्या बढ़ाने, हवादार स्टोर रूम, डांस रूम, आर्ट एंड क्राफ्ट रूम, हॉल, कंप्यूटर रूम, लैब आदि की जरूरतें बताईं हैं। हालांकि यहां की सबसे बड़ी समस्या पानी को बताया गया है। इसके साथ ही विद्यालय में छात्राओं के लिए अतिरिक्त शौचालय बनवाने की भी जरूरत बताई गई है।

कस्तूरबा विद्यालय, चाकुलिया
सप्लाई का पानी, बेसिन और नलों की व्यवस्था करने की जरूरत स्कूल प्रबंधन ने बताई। साथ ही कहा कि वहां एक बड़ा हॉल, प्यूरीफायर, स्मार्ट क्लास, शौचालय की जरूरत है। छात्रावास में कमरे कम हैं।

कस्तूरबा विद्यालय, धालभूमगढ़
इस विद्यालय ने अपनी चहारदीवारी को और ऊंचा करने की मांग की है। साथ ही बड़ा सेप्टिक टैंक, लड़कियों के खेलने के लिए मैदान और हवादार रसोई घर की आवश्यकता बताई है।

कस्तूरबा विद्यालय, पोटका
विद्यालय प्रबंधन की ओर से यहां पहली आवश्यकता छात्रावास की क्षमता बढ़ाने को कहा गया है। यहां वर्तमान में एक रूम में 18 से 20 छात्राएं रह रही हैं, जबकि इसकी क्षमता 10 से 12 की है। इसके अलावा पानी भी यहां की बड़ी समस्या है। इसलिए डीप बोरिंग की मांग की गई है। शुद्ध पानी के लिए प्यूरीफायर, शौचालय आदि की जरूरत बताई गई।

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