घाघीडीह सेंट्रल जेल में रविवार को जेल अदालत लगाई गई। इसमें 10 कैदियों के अलग-अलग नौ केस की सुनवाई हुई। दो मामलों का ऑन द स्पॉट निपटारा करते हुए कैदियों को रिहाई दे दी गई।
पहला मामला (जीआर-3000/17) मोबाइल चोरी का था। इस मामले में कैदी सुदीप कुमार दत्ता ने अपने अपराध को स्वीकार करते हुए आगे से गलती नहीं करने की बात कही। सुदीप 24 जनवरी 2018 से जेल में था। दूसरा मामला (जीआर 3876/17) अवैध शराब बिक्री का था। इस मामले में 23 दिसंबर 2017 से जेल में बंद राहुल सिंह ने कोर्ट के समक्ष ऐसी गलती नहीं करने की बात की। मामलों की सुनवाई करते हुए प्रथम श्रेणी न्यायिक पदाधिकारी एमएम प्रधान ने दोनों की रिहाई का आदेश दिया। रविवार को कागजी कार्रवाई करते हुए दोनों को रिहा कर दिया गया। इसके अलावा अन्य सात केस पर सुनवाई हुई, लेकिन अन्य कारणों से निपटारा नहीं हो पाया।
मालूम हो कि जेल अदालत नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) की गाइडलाइन के आधार पर डालसा (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) द्वारा लगाया जाता है। इसके अलावा जेल में महिला बंदियों के लिए 10 दिवसीय लीगल अवेयरनेस कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जेल अदालत में सीजेएम ओंकारनाथ चौधरी, डालसा के प्रभारी सचिव वाईसी वर्मा, प्रथम श्रेणी न्यायिक पदाधिकारी मनोज कुमार शर्मा, कृष्णा लोहरा, एंजलिना जॉन, संजीविका गुइन, अर्पणा कुमारी, डालसा के अधिवक्ता राजेश कुमार श्रीवास्तव, प्रीति मुर्मू, पीएलवी कृष्णा जाधव व सीमा कुमारी शामिल थे।
जेल अदालत में सुनवाई करते डालसा के पदाधिकारी।