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अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 1000 चुनिंदा आपराधिक कांडों का होगा तेजी स्पीडी ट्रायल

3 वर्ष पहले
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शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज सभी कांड, अनुसूचित जाति -जनजाति अत्याचार निरोध अधिनियम, दुष्कर्म , पोस्को अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम , भ्रष्टाचार अधिनियम, सरकारी संपत्ति -धन के गबन से संबंधित, ब्लैकमेलिंग, लूट और सीसीए।

जिलो के लिए अलग-अलग निर्धारित किया गया है लक्ष्य

सभी जिलों को ट्रायल के लिए चिंहित किए जाने वाले आपराधिक कांडों के लिए लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। सबसे ज्यादा रांची , जमशेदपुर और धनबाद को 100 कांडों को चिंहित करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा पलामू , बोकारो, गिरिडीह, और देवघर को 50-50, चतरा और रामगढ़ को 40-40, खूंटी, गुमला, गढ़वा, दुमका, कोडरमा को 30-30, सिमडेगा, पाकुड़ , लोहरदगा, साहेबगंज, गोड्डा, जामताड़ा को 20-20 कांडों को विचारण के लिए चिंहित करने का टारगेट दिया गया है।

अपराधियों को जल्द सजा दिलाने में मिलेगी मदद

आपराधिक मामलों में जितनी जल्द ट्रायल होगा अपराधियों को उतनी ही जल्दी सजा मिल सकेगी। जल्द ट्रायल होने से गवाह के रूप मे आने वाले साक्ष्य भी ज्यादा से ज्यादा और समय पर उपलब्ध हो पाएंगे। इतना ही नहीं जल्द ट्रायल होने पर गवाहों को प्रभावित करने का मौका भी अभियुक्तों को कम से कम मिलेगा। ट्रायल जल्द होने और सजा जल्द मिलने से अपराध में कमी आएगी।

गृह विभाग ने सभी जिलों के एसपी को दिया निर्देश, 11 तरह के कांडों में की जानी है त्वरित ट्रायल

जून से शुरू होगा ट्रायल, अपराधियों को जल्द मिल सकेगी सजा

बिनोद ओझा | रांची

राज्य में अपराध और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए हाई कोर्ट के निर्देश के बाद 1000 संवेदनशील और बड़े आपराधिक कांडों में जल्द से जल्द ट्रायल शुरू करने की कवायद शुरू की गई है। गृह विभाग ने राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे त्वरित निष्पादन के लिए अपने-अपने जिलों में कांडों को चिंहित करें। ऐसे आपराधिक कांडों को चिंहित किया जाए जिनके अनुसंधान का स्तर काफी ऊंचा हो और उन मामले में बिना किसी बाधा के वांछित समय सीमा के भीतर ट्रायल पूरा किया जा सके। निर्देश दिया गया है कि ट्रायल के लिए चिंहित किए जाने वाले कांडों में कोई भी ऐसा मामला न हो जिसमें अभियुक्त को फरार बताते हुए आरोप पत्र दाखिल किया गया है। क्योंकि ट्रायल के दौरान अभियुक्त को पेश नहीं किया जा सकेगा। कांडों के चयन के लिए एसएसपी या एसपी अपने जिले के डीएसपी मुख्यालय और लोक अभियोजक के साथ मिलकर करेंगे। गृह विभाग ने यह भी निर्देश दिया गया है कि इसकी कॉपी अपराध अनुसंधान विभाग को भी सौंपा जाए।

इस तरह के कांडों को ट्रायल के लिए किया जाना है चयन

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