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हादसों में घायलों को समय पर नहीं मिल पाता है समुचित इलाज, लंबे समय से की जा रही है मांग

3 वर्ष पहले
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जामताड़ा जिले के तीन स्थानों पर ट्रामा सेंटर खोला जाएगा। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए स्थन चयन कर स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है। यह ट्रामा सेंटर जिले में अत्यधिक सड़क हादसों वाले स्थल पर खोला जाएगा। ताकि सड़क घायलों को तत्काल इलाज शुरू किया जा सके। हाल के कुछ दिनों में जामताड़ा में सड़क हादसे में काफी ईजाफा हुआ है। सबसे अधिक सड़क हादसा जिले के नारायणपुर प्रखंड में हुआ है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीन जगहों में ट्रामा सेंटर खोलने की तैयारी की है। जिले में कहीं भी ट्रामा सेंटर के नहीं रहने पर सड़क हादसों के घायलों को जामताड़ा सदर अस्पताल में ईलाज किया जाता है। कभी-कभी ऐसा देखा गया है कि सड़क हादसों के घायलों को जिला सदर अस्पताल तक लाते-लाते रास्ते में ही दम तोड़ दिया है। ट्रामा सेंटर के खुलने से घायलों की ईलाज की सारी सुविधा घटनास्थल पर ही मिल जाएगी। जानकारों का मानना है कि जब से गोविंदपुर-साहेबगंज हाईवे सड़क बनी है तब से सड़क दुर्घटना बढ़ी है। लोग अपनी बाइक या वाहनों को लापरवाही से चलाते हैं। इस वर्ष माह मई तक लगभग दो दर्जन से अधिक लोगों की जान सड़क हादसे में गयी है।

पबिया, पुराना सदर अस्पताल और सीएचसी फतेहपुर में ट्रामा सेंटर के लिए भेजा प्रस्ताव

हाइवे होने के कारण सड़क हादसों में हुई वृद्धि, अब ट्रामा सेंटर में होगा इलाज

जिले में तीन जगहों को ट्रामा सेंटर के लिए चिन्हित किया गया है। गोविंदपुर-साहेबगंज सड़क में नारायणपुर के पबिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एनएच 419 में जामताड़ा पुराना सदर अस्पताल तथा गोविंदपुर-साहेबगंज हाईवे किनारे फतेहपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को चिन्हित किया गया है। इन जगहों में ट्रामा सेंटर के खुलने से हाईवे सड़क पर हो रही दुर्घटना के घायलों की ईलाज तुरंत संभव होगी। घायलों को जामताड़ा लाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। जिले के फतेहपुर प्रखंड जिला मुख्यालय से लगभग चालीस किमी की दूरी पर पड़ती है। नारायणपुर प्रखंड जिला मुख्यालय से लगभग बीस से बाईस किमी पड़ती है। ऐसी परिस्थिति में सड़क दुर्घटना के घायलों को जिला सदर अस्पताल में लाते-लाते बहुत देर हो जाती है। वहीं ट्रामा सेंटर के खुलने से घायलों को जिला मुख्यालय के सदर अस्पताल में लाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

जिले के हाईवे किनारे तीन स्थानों पर ट्रामा सेंटर खोलने का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद ट्रामा सेंटर में कार्य प्रारंभ होगा। इन तीन स्थानों में नारायणपुर का पबिया, जामताड़ा के पुराने सदर अस्पताल तथा फतेहपुर के पीएचसी में खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है। दीपक कुमार गुप्ता, डीपीएम, एनआरएचएम

इधर, निजी अस्पतालों, क्लीनिक व जांच घरों में सरकार की गाइडलाइन का पालन नहीं होने पर होगी कार्रवाई

सिटी रिपोर्टर|जामताड़ा

क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के अनुपालन के लिए उपायुक्त द्वारा गठित जिला स्तरीय टीम िनजी अस्पतालों, क्लीनिक एवं जांच घरों की जांच करेगी। आवश्यक आहर्ता संबंधी चेकलिस्ट तैयार कर निरीक्षण दल द्वारा जांच की जाएगी। निरीक्षण के क्रम में आहर्तापूर्ण नहीं करने वाले को सुधार के लिए 15-30 दिनों का समय-सीमा निर्धारित किया जाएगा। इसके उपरांत पुन: निरीक्षण कर इसका सत्यापन किया जाएगा। विभाग के इस प्रयास से जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का बेहतर लाभ मिल सकेगा।

ज्ञात हो कि नीजि अस्पतालों, क्लीनिक एवं जांच घरों द्वारा मनमानी एवं सरकार के गाइडलाइन की अनदेखी किया जाता है जिसका खामियाजा मरीज एवं उनके परिजनों को भुगतना पड़ता है। वैसे अस्पताल जहां आईपीडी की सेवाएं दी जा रही है वहां 24x7 एक चिकित्सक का रहना अनिवार्य है। जिस अस्पताल में एक भी चिकित्सक नहीं पाए जाएंगे। उस अस्पातल के प्रबंधक/संचालक से 24 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण प्राप्त करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के क्रम में बगैर निबंधन के संचालित अस्पतालों, क्लीनिक एवं जांच घर को चिन्हित कर नियमानुसार कार्रवाई सिविल सर्जन द्वारा किया जाएगा। जिला स्तरीय बैठक कर सरकारी एवं नीजि अस्पतालों, पैथोलाॅजी संचालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश पूर्व में दिया गया है। संचालित नीजि अस्पतालों, क्लीनिक एवं जांच घर का निबंधन कराने का आदेश दिया गया है। क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत सभी नीजि अस्पतालों को पूछताछ केंद्र के समीप अस्पताल से संबंधित चिकित्सक का नाम, उनकी योग्यता, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर एवं सेवाओं का शुल्क का विवरण हिंदी व अंग्रेजी में प्रदर्शित करना अनिवार्य है।

एक्ट में यह भी प्रावधान है कि मरीज व अभिभावक द्वारा मांगे जाने पर अस्पातल/नर्सिंग होम का नाम, बेड संख्या, सेवा प्रदाता चिकित्सक का नाम एवं दैनिक सेवाओं के शु:ल्क का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए लगेगी मशीन

सदर अस्पताल जामताड़ा एवं नीजि संस्थानों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट को निस्तारण के लिए पोर्टबल इंसीनरेटर मशीन जल्द लगाया जाएगा। जल्द ही इसकी लागत, क्षमता आदि विवरण की फाईल उपायुक्त को दिया जाएगा। मशीन के स्थापित होने से पर्यावरण दूषित होने से बचेगी तथा लोग भी बीमारियों से बच सकेंगे।

क्लीनिक एवं जांच घर का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य

क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट का जिले में कड़ाई से अनुपालन के लिए उपायुक्त द्वारा निरीक्षण दल का गठन किया गया है। जिले में संचालित नीजि अस्पतालों, क्लीनिक एवं जांच घर का रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है। अवैध रूप से इसका संचालन करने पर एक्ट के तहत कार्रवाई की जायेगी। डॉ वीके साहा, सिविल सर्जन

डीसी के निर्देश पर निरीक्षण के लिए पदाधिकारियों की बनी टीम

उपायुक्त के निर्देश पर जिले में संचालित नीजि अस्पतालों, क्लीनिक एवं जांच घर का निरीक्षण के लिए टीम का गठन किया गया है। जिसमें जिला प्रशासन की ओर से उप विकास आयुक्त, स्वास्थ्य विभाग की आेर से सिविल सर्जन, जिला मलेरिया पदाधिकारी, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक जामताड़ा को रखा गया है।

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