मदरसा दारुल उलूम वहादिया मोहड़ा के नाजिम हाजी मौलाना रजाउद्दीन अंसारी ने बताया कि रमजान का माह मुस्लिम भाइयों के लिए बड़ी अजमत व रहमत का होता है। रमजान के महीने में रोजेदारों द्वारा सच्चे दिल व दिमाग से मांगी गई दुआएं कबूल होती है। रमजान माह में जहां शैतान के लिए दरवाजा बंद हो जाता है, वहीं आम इंसानों के लिए रहमत का दरवाजा खुल जाता है।
उन्होंने कहा कि माहे रमजान को लेकर बच्चों बूढ़ों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बताया कि रमजान माह को तीन आसरा में बांटा गया है। पहला आसरा रहमत का दूसरा आसरा मगफिरत एवं तीसरा आसरा जहन्नुम से आजादी का है। रमजान माह में अल्लाह ताला अपने बंदों पर रहमत नाजिल करते है। रोजा के दौरान हम अपने आमाल का जायजा लें और गलतियों पर निगाह डालें ताकि आने वाले दिनों से फिर से गलती न दोहराई जाए। रमजान का पूरा पूरा हक अदा करते हुए खूब माफी मांगनी चाहिए। रोजा इस्लाम के पांच र|ों में से एक है। इस्लाम धर्म में 5 बुनियादी चीजें हैं। तोहीद नमाज रोजा जकात एवं हज रोजा फजले खुदा बंदी का चमकता हक अदा करती है।