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Rs.50 लाख खर्च करने के बाद भी नहीं बना पाए स्वच्छता रैंकिंग में जगह

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में सफाई के मामले में जांजगीर-नैला निकाय को रैंकिंग में स्थान नहीं मिला है। जांजगीर-नैला शहर पहली बार इस प्रतिस्पर्धा में शामिल हुआ था। स्वच्छता रैंकिंग के लिए दिल्ली से बुधवार को केवल चुनिंदा शहरों के नाम घोषित किए गए हैं, जिसमें जांजगीर-नैला का नाम नहीं है।

एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में सफाई के मामले में जांजगीर-नैला टॉप-10 में नहीं है। मिशन क्लीन सिटी के नाम पर 50 लाख रुपए खर्च होने के बाद ऐसी स्थिति है। वार्डों में डोर टू डोर कचरा नहीं उठ रहा। ओडीएफ घोषित होने के बाद भी शौचालय बनते रहे। शहर में गंदगी फैली है। कचरा निपटारा करने कंपोजिट शेड अधूरा पड़ा है। एसएलआरएम सेंटर भी नहीं बने ,इसलिए शहर का नाम सूची में नहीं है। इसके अलावा अन्य निकाय भी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के तहत जिले के जांजगीर-नैला, चांपा, अकलतरा, सक्ती, बलौदा, राहौद, शिवरीनारायण, नवागढ़, अड़भार, बाराद्वार, सारागांव, डभरा में केन्द्रीय टीम के सदस्यों ने सर्वे किया था। जिसके आधार पर रैंकिंग जारी की गई। जिले के अफसरों का कहना है कि प्रदेश की रैंकिंग अभी जारी नहीं हुई है।

वार्ड नंबर 6 में नहीं उठ रहा डोर टू डोर कचरा, ऐसी पटी है नालियां

वार्ड में नियमित सफाई नहीं होने से कचरा हो रहा नालियों में जाम।

नगर पालिका में इस तरह खर्च किए गए 50 लाख रुपए

मिशन क्लीन सिटी के नाम पर 18 हजार डस्टबिन, पांच आटो टीपर, हाथ गाड़ी और महिला समूहों के ड्रेस में करीब 51 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। 70 महिला समूहों को 5000 रुपए के मानदेय से प्रति महीने साढ़े तीन लाख रुपए व पांच आटो टीपर चालकों को 5 हजार रुपए के हिसाब 25 हजार रुपए का मानदेय दिया जा रहा है। मास्क, हैंड ग्लब्स, ड्रेस में 2 लाख रुपए खर्च हुए हैं, फिर भी स्वच्छता नजर नहीं आ रहा।

1 लाख से कम आबादी वाले शहरों मेंे सफाई के मामले में जिले के निकाय फिसड्‌डी, प्रदेश की सूची में नाम आने की उम्मीद जता रहे अफसर

अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया, लापरवाही बरती इसलिए पिछड़े: अध्यक्ष

नगर पालिका अध्यक्ष मालती देवी रात्रे का कहना है कि पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों ने पहले ही स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को लेकर बिल्कुल गंभीरता नहीं बरती। मिशन क्लीन सिटी से जुड़े शहर में निर्माण के सभी काम चाहे एसएलआरएम सेंटर हो, कंपोजिट शेड का निर्माण हो, अधूरे पड़े हैं। स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने का कारण है।

वार्ड क्रमांक 19 में डेढ़ महीने से नहीं उठ रहा कचरा

वार्ड क्रमांक 19 के पार्षद अमर सिंह गोंड़ ने बताया कि वार्ड में कचरा उठाने अभी एक गाड़ी लेकर ही समूह की महिलाएं आ रही है। इंदिरा नगर तरफ के मकानों से कचरा उठ रहा है। पहले दो गाड़ी आती थी। बीटीआई के पीछे के मकानों से करीब डेढ़ महीने से कचरा उठाने महिलाएं नहीं आ रही। स्वच्छता प्रभारी से इसकी शिकायत किए थे लेकिन व्यवस्था नहीं बनी।

स्वच्छता सर्वे रैंकिंग में क्यों पिछड़े हम, जानिए 6 कारण

1. फरवरी में जब सर्वे के लिए दिल्ली की टीम का यहां दौरा हुआ था, तब शहर में न तो एलएआरएम सेंटर बन पाए थे न ही जैविक खाद बनाने का काम शुरू हो सका था। इस दौरान खुले में ही कचरा डंप हो रहा था। स्वच्छ सर्वेक्षण में यह महत्वपूर्ण बिंदु है। माना जा रहा है कि कचरा प्रबंधन में नाकामी बड़ी वजह हो सकती है।

2. स्व-सहायता समूह की महिलाएं घर में जाकर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन तो कर रही थी, लेकिन 25 वार्डों में पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया था। सार्वजनिक जगहों में कचरे का ढेर था। दो महीने से वार्ड 6 व 19 में घरों से कचरा तक नहीं उठ रहा।

3. नगर पालिका द्वारा सड़कों पर कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाने की बात कही, लेकिन कभी अमल नहीं किया।

4. शहर में बने शौचालयों का मेंटेनेंस बड़ा विषय था। कई शौचालय में पानी तक नहीं है।

5. भले ही जांजगीर-नैला को ओडीएफ घोषित किया जा चुका था लेकिन शौचालय बनाने का काम चल रहा था। लोग खुले में जा रहे थे। एक बार गंदगी मिलने से दिल्ली से आई टीम शहर को गंदा बताकर वापस भी लौट गई थी।

6. केन्द्रीय टीम ने यहां जिन बिंदुओं पर सर्वे किया था, उनमें सफाई के लिए मोबाइल एप का उपयोग शामिल है। नपा ने लक्ष्य 300 से ज्यादा 500 लोगों को मोबाइल पर एप डाउनलोड करवाया लेकिन शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई में देरी होती रही।

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