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स्मार्ट कार्ड होने के बावजूद 1 हजार 20 केस में मरीजों को Rs. 29 लाख का भुगतान करना पड़ा

3 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल में स्मार्ट कार्ड बनाने पहुचें लोग।

कार्ड क्लेम की स्थिति पर एक नजर

क्लेम ब्यौरा शासकीय अस्पताल निजी अस्पताल

कुल क्लेम 7000 20000

क्लेम राशि 1 करोड़ 25 लाख 14 करोड़

रिजेक्ट क्लेम 730 290

रिजेक्ट राशि 10 लाख 29 लाख

पेंडिंग क्लेम 1385 3500

पेंडिंग भुगतान राशि 26 लाख 3 करोड़ 26 लाख

805 बीमारियों के इलाज की सुविधा, जानकारी नहीं

स्मार्ट कार्ड से 805 तरह की बीमारियों के मुफ्त इलाज की सुविधा है, लेकिन परिवारों को इसकी जानकारी नहीं है। यही नहीं, अस्पतालों में इन बीमारियों की कोई सूची नहीं टंगी है, जिससे ये पता लग सके कि किसी बीमारी के इलाज में कार्ड से कितनी राशि क्लेम होना है। इस पर स्वास्थ्य विभाग भी ध्यान नहीं दे रहा है।

जिले 21 स्वास्थ्य केंद्रों को स्मार्ट सेवा से जोड़ा गया

21 प्राथिमक स्वास्थ्य केंद्रों में यह सेवा शुरू की जा रही है। इसमें अकलरा के नरियरा, बलौदा के गतवा, पहरिया, पंतोरा, बम्हनीनडीह के चाेरिया, सोठी, डभरा के चंद्रपुर, कोटमी, टुंड्री, हसौद, मालखरौदा के अड़भार, फगुरम, घोघरी, नवागढ़ के केरा, पामगढ़ के राहैद और सक्ती ब्लॉक के सिविल डिस्पेंसरी बाराद्वार, देवरी ,पोरथा को शामिल है।

कार्ड में बीमारियाें का पैकेज निर्धारित है। पैकेज में नहीं होने पर कंपनी अप्रूवल नहीं देती। कई बार अप्रूवल मिलने के बाद भी कम राशि दी जाती है। इसके लिए बात की जा रही है। वहीं कुछ तकनीकी खामियां है जिसे शॉट आऊट किया जा रहा है। \\\'\\\' डॉ. व्ही जयप्रकाश, सीएमएचओ, जांजगीर-चांपा

11 सरकारी व 17 निजी अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड से इलाज की सुविधा

भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा

मुफ्त इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड स्वीकार करने के नियमों ने कई बार मरीज व उनके परिजनों को संकट में डाल दिया है। कई बार इंश्योरेंस कंपनी से इलाज की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण मरीजों को मजबूरन स्वयं के खर्चे पर इलाज कराना पड़ा है। जिले में ऐसे 1 हजार 20 केसों में मरीजों को के इलाज के लिए लगभग 29 लाख रुपए चुकाने पड़े। खास तौर से प्राइवेट हॉस्पिटल की अपेक्षा शासकीय अस्पतालों में रिजेक्ट क्लेम के मामले अधिक हैं।

जिले के 4 लाख 57 हजार 370 परिवारों को 11 शासकीय और 12 निजी अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड के जरिए फ्री इलाज की सुविधा है। पिछले वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 के बीच इन अस्पतालों में हेल्थ कार्ड से लगभग 27 हजार मरीज इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 290 मामलों में प्राइवेट हॉस्पिटल का लगभग 19 लाख रुपए का क्लेम बीमा कंपनी से अप्रूवल न मिलने से रिजेक्ट हो गया। वहीं शासकीय अस्पतालों के 730 केसों में लगभग 10 लाख रुपए का क्लेम रिजेक्ट हो गया। ऐसे में गरीबी के मारे परिजनों ने मजबूरन कैश जमा कर अपने मरीजों का इलाज कराया। अस्पतालों में अब भी कई मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें किसी न किसी कारण से अप्रूवल नहीं मिल रहा है।

कार्ड से 50 हजार रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा, समस्या होने पर करें 104 में काॅल - स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राष्ट्रीय व मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीपीएल परिवारों का स्मार्ट कार्ड बनाया है। कार्ड के जरिए एक साल में 50 हजार रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। जिले में 4 लाख 57 हजार 370 परिवाराें का हेल्थ स्मार्ट कार्ड बना है।

जिनके लिए महंगे इलाज का खर्च उठा पाना संभंन नहीं होता है। ऐसे में या तो संपत्ति बेचकर इलाज करना होता है या दूसरों से उधार लेकर। स्मार्ट कार्ड से इलाज कोई समस्या हाेने पर विभाग द्वारा टोल फ्री नंबर 104 जारी किया गया है, जहां वे अपनी समस्याएं बता सकतें हैं।

इलाज काे आए 27 हजार में से 4 हजार 885 केस में क्लेम पेंडिंग -बीते एक साल में हेल्थ स्मार्ट कार्ड से अस्पतालों में इलाज के लिए 27 हजार मरीज आए। इनमें से 1 हजार 20 केस में स्मार्ट कार्ड को अप्रूवल नहीं मिल सका, वहीं 4 हजार 885 मामलों में अस्पतालों का 3 करोड़ 26 लाख रुपए बीमा कंपनी ने अटका दिया है। क्योंकि अस्पतालों ने इलाज से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट (दस्तावेज) जमा नहीं किया है।

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