दुष्कर्म पीड़िता की पहचान बताने पर 6 माह की जेल
भास्कर न्यूज | जांजगीर-चांपा
दुष्कर्म व छेड़छाड़ पीड़िता की पहचान किसी भी प्रकार से सार्वजनिक करने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसा करने पर छह माह की सजा का भी प्रावधान है, इसके बाद भी ऐसे लोगों की पहचान सार्वजनिक की जा रही है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने ऐसे लोगों को चेतावनी दी है कि इस प्रकार किसी पीड़िता की पहचान सार्वजनिक न करें।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 228, 376, एवं लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 23 (1) (2) के अनुसार दुष्कर्म पीड़ित महिला, बच्चों की पहचान की गोपनीयता अनिवार्य रूप से बनाये रखा जाना है। विगत दिनों कुछ ऐसे प्रकरण प्रकाश में आए है, जिनमें सोशल मीडिया के द्वारा दुष्कर्म पीड़ित महिला, बच्चों की तस्वीर, पहचान, पता, परिवार की पहचान सार्वजनिक कर गोपनीयता भंग की जा रही है। ऐसे असंवेदनशील आचरण के कारण दुष्कर्म पीड़ित महिला, बच्चों को विभिन्न सामाजिक एवं मानसिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है, साथ ही दुष्कर्म पीड़ित परिवार के प्रतिष्ठा को भी ठेस पहंुचती है। यह भारतीय दंड संहिता एवं पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन है।
इस अपराध का होगा दोषी
धारा 21 के तहत कोई व्यक्ति जो धारा 19 (1) के अधीन अपराध के किये जाने की रिपोर्ट करने में विफल रहता है तथा जो धारा 19 की उपधारा (2) के अधीन ऐसे अपराध को अभिलिखित करने में विफल रहता है तो उन्हें 6 माह की कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।